
मणिपुर में 500 सालों से भी ज्यादा पुराना एक बाजार है जहां पुरूष नहीं जा सकते है। इस बाजार का नाम है ईमा केइथाल। इस बाजार में शान्ति से सब खरीदारी करते हैं और बिल्कुल भी शोर शराबा नहीं करते। कहा जाता है कि आजादी के पहले पुरूषों ने इस बाजार को कई बार नष्ट करना चाहा। ऐसे में यहां की महिलाएं एकजुट होकर इसकी रक्षा की। इस बाजार में केवल शादीशुदा महिलाएं ही दुकान लगाती हैं। इसे पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे बड़ा बाजार माना गया है।

केन्या में एक ऐसा गांव है जहां पुरूष बिल्कुल भी नहीं जा सकते हैं। इस गांव को उमोजा गांव के नाम से जाना जाता है। केवल 15 महिलाओं ने मिलकर 1990 में इस गांव की शुरूआत की थी। इस गांव में केवल ऐसी महिलाएं रहती हैं जिन्हें समाज के रूढ़ीवादी कानूनों ने ही उन्हें उनके घर से बेदखलकर दिया। यहां की महिलाएं पर्यटकों का स्वागत करती हैं और जीविका के लिए उन्हें अपने हाथ से ज्वेलरी बनाकर भी बेचती हैं। अभी इस गांव में करीब 47 महिलाएं और 200 बच्चे रहते हैं। यहां की महिलाएं खुद को घरेलू और सामाजिक हिंसा से बचाने में सफल हुई और इससे वे काफी खुश हैं।

तमिलनाडु के कोयंम्बटूर में स्थित भैरवी मंदिर जहां के गर्भ गृह में पुरूषों का जाना मना है और तो और पूजा के कुछ खास रस्मों में पुरूष भाग भी नहीं ले सकते हैं।

तमिलनाडु के एक और मंदिर में पुरूष नहीं जा सकते हैं। यह मंदिर है तमिलनाडु का कन्या कुमारी मंदिर जो कि एक शक्ति पीठ भी है। लोगों का कहना है कि विष्णू ने जब सती के शरीर का खंडन किया था तब उनकी रीढ़ की हड्डी यहां पर गिरी थी। इसमें भगवती देवी मां का वास है और माता एक सन्यासी हैं इसलिए यहां पर अविवाहित पुरूषों का जाना मना है।

राजस्थान के पुष्कर में एक ब्रह्मा मंदिर है जहां पर अविवाहित पुरूषों का जाना मना है। इस मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया था। पूरे देश में ब्रह्मा जी का ये एकलौता मंदिर है।

केरल के अट्टुकल मंदिर में पोंगल का सबसे बड़ा आयोजन किया जाता है। जहां 30 लाख से भी ज्यादा महिलाएं इसे धूम-धाम से मनाती हैं। इतनी भारी तादात में किसी धार्मिक उत्सव में भाग लेने के कारण इसका नाम गिनीस बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज है। इस उत्सव को करीब 10 दिनों तक मनाया जाता है और इन दिनों कोई भी पुरूष मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते।

केरल के चाक्कुलाथूकाभू मंदिर में भी पुरूष के प्रवेश पर मनाही है। हालांकि साल भर उनपर रोक नहीं है केवल धनुर मास में धनु पूजा के दौरान, संक्रान्ति के समय और नारी पूजा के दौरान पुरूष इस मंदिर में नहीं जा सकते हैं।