
सोवियत यूनियन में 1970 में एक न्यूक्लियर पावर प्लांट को बनाने की तैयारी हो रहा था, लेकिन 26 अप्रैल 1986 के बाद वह इलाका भूतों का बन गया। हम बात कर रहे हैं चेरनोबिल हादसे की।

चेरनोबिल का हादसा ऐसा था कि 1000 टन की छत तक उड़ गई। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर वह भयानक हादसा हुआ कैसे? चेरनोबिल में चार रिएक्टर्स लगे हुए थे। ये चार रिएक्टर्स कम से कम 1000 मेगावॉट की बिजली पैदा करते थे।

चेन रिएक्शन को कंट्रोल करने के लिए तब यहां ग्रेफाइट और पानी का इस्तेमाल किया जाता था। 26 अप्रैल 1986 की सुबह चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा प्लांट के चौथे रिएक्टर में गड़बड़ी होने लगी।

इसके बाद रिएक्टर को बंद करने में 20 सेकंड का समय था। लेकिन उसके बंद होने के 7 सेकंड में ही ज़ोरदार बिजली चमकी जिसके बाद रासायनिक विस्फोट शुरू हो गए। विस्फोट इतना भयंकर था कि प्लांट की 1000 टन की छत भी उड़ गई।

रिएक्टर में हुए विस्फोट से 31 लोग तुरंत ही मारे गए। विस्फोट के बाद रिएक्टर में मौजूद 190 टन यूरेनियम डायऑक्साईड का चार प्रतिशत हिस्सा हवा में फैल गया। विस्फोट के बाद भी रेडिएशन हवा में फैला जिससे कई सालों तक आसपास के लोगों का स्वास्थ ख़राब रहा।