
jyotisar akshay vatvriksh kurukshetra
महाभारत में वर्णित है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। जिस जगह यह ज्ञान दिया गया था उस जगह को ज्योतिसर कहा जाता है। यहां एक वटवृक्ष भी है इसी अक्षय वट वृक्ष के नीचे करीब पांच हजार वर्ष पहले कौरवों और पांडवों की सेनाओं के बीच खड़े पीतांबरधारी श्रीकृष्ण ने सारथी के रूप में अर्जुन को दिव्य नेत्र देकर अपने चतुर्भुज और विराट स्वरूप के दर्शन करवाए थे। इस वटवृक्ष को महाभारत युद्ध का साक्षी मान कर इसके आगे भक्त तथा श्रद्धालु शीश नवाते हैं। आइए जानते हैं इस जगह से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातें...
इसलिए इस जगह को कहते हैं 'ज्योतिसर'
ज्योति सर यानी ज्ञान का सरोवर, यहां गीता ज्ञान देने के कारण ही इस स्थल को ज्योतिसर कहा जाता है। यह पवित्र तीर्थ स्थान पौराणिक सरस्वती नदी के किनारे पर है। हालांकि नदी अब लुप्त हो चुकी है। प्राचीन समय में यहां के शिव मंदिर भी हुआ करता था अतः कुछ लोग इसे ज्योतिश्वर महादेव भी कहते हैं। यहां के अक्षय वटवृक्ष की शाखाएं भी पहले काफी दूर तक फैली हुई थी जिन्हें काट दिया गया और अब यह कई भागों में है लेकिन अपने मूल स्थान पर भी कायम है।


Published on:
24 Aug 2016 12:25 pm
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