
पीलीभीत। 9 जून 2014 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व की स्थापना की गई थी। तब से लगातार स्थानीय पर्यावरण व वन्यजीव प्रेमी यहां क्षेत्र निदेशक फील्ड डायरेक्टर की नियुक्ति किये जाने की मांग कर रहे थे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पिछले दो सालों में बाघ ने जंगल के अंदर और बाहर करीब 24 लोगों की जान ले ली। बाघ संकट इतना गहराया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पीलीभीत आना पड़ा। उस दौरान उन्होंने घोषणा की कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में क्षेत्र निदेशक की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने ये घोषणा अगस्त 17 में की थी जिस पर अब जाकर अमल हुआ है। दो जून 2018 को आखिरकार टाइगर रिजर्व में क्षेत्र निदेशक पद पर एच राजा मोहन की नियुक्ति कर दी गई है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि वे कब पदभार ग्रहण करेंगे।
वहीं उपनिदेशक के पद पर सामाजिक वानिकी प्रभाग पीलीभीत के प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार की नियुक्ति की गई है। आदर्श कुमार को मानव-वन्यजीव संघर्ष का खासा अनुभव है। वहीं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लंबे समय तक रहे प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश को प्रभागीय वनाधिकारी चित्रकूट के रूप में नई तैनाती दी गई है। सामाजिक वानिकी प्रभाग में चंबल वन्यजीव विहार के डिप्टी डायरेक्टर रहे संजीव कुमार को तैनात किया गया है। फिलहाल अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पहले क्षेत्र निदेशक के रूप में एच राजामोहन आ रहे है। वहीं बराही के वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह को दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन की धौरहरा रेंज का वन क्षेत्राधिकारी बनाया गया है।