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चित्रकूट के नक्शे से गायब हो गए आधा सैकड़ा आराजी नंबर, राजस्व अभिलेख में छेड़छाड़ का हुआ बड़ा खुलासा

बंधित नंबरों के नक्शे की शीट भी कर दी गायब

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 22, 2019

50 escaped numbers missing from the map of Chitrakoot

50 escaped numbers missing from the map of Chitrakoot

रमाशंकर शर्मा@सतना। कांग्रेस सरकार के वचन पत्र में चित्रकू ट और राम वनगमन पथ प्राथमिकता में है। इन स्थितियों में निकट भविष्य में यहां व्यापक पैमाने पर विकास और विस्तार के काम होने हैं। ऐसे में एक बड़ा खुलासा यह हुआ है कि यहां के नक्शे से आधा सैकड़ा के लगभग आराजियों के नंबर ही नक्शे से गायब है। राजस्व और भू-अभिलेख की मिलीभगत से हुए इस बड़े फर्जीवाड़े का अब खुलासा हुआ है।

हालात यह है कि चित्रकूट में विकास और विस्तार के लिए शासकीय आराजियां ही ढूढ़े नहीं मिल रही है। उधर कई सरकारी आराजियां बिना सक्षम अधिकारी के आदेश से निजी कर दी गई हैं और उन्हें जमीन कारोबारियों ने बेच भी दिया है। मिली जानकारी के अनुसार चित्रकूट के पटवारी हल्का कामता क्रमांक 33 गांव रजौला के राजस्व अभिलेखों के मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है।

बताया गया है कि यहां की आराजी क्रमांक 350 से 400 के बीच के नंबर नक्शे से गायब कर दिये गए हैं। राजस्व अमले और भू-अभिलेख कार्यालय की मिलीभगत से किए गए इस खेल में सरकारी जमीन को अपने कब्जे में करने और सड़क साइड की जमीन को अपने अधिपत्य में लेने के लिए यह खेल किया गया है। प्रथम दृष्टया जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार इन नंबरों की नक्शे की शीट भी गायब करवा दी गई है।

ठंडा पड़ा मिनी स्मार्ट सिटी का प्लान
एक अन्य जानकारी में बताया गया है कि चित्रकूट को मिली स्मार्ट सिटी का दर्जा देने के बाद यहां पर श्रीराम पेनोरामा, तीर्थ यात्री सेवा सदन और तीर्थ यात्री काटेज बनाना प्रस्तावित है। यह काम तीर्थ स्थाना मेला प्राधिकरण के जिम्मे दिया गया है। विगत माह चित्रकूट विकास प्राधिकरण की समीक्षा बैठक में संचालक के संज्ञान में यहां के प्रस्तावित कामों का ब्यौरा भी रखा गया था। इसके बाद शुरू हुई खोज खबर में पाया गया कि तीर्थ यात्री सेवा सदन के लिये 15 हजार वर्ग फीट, तीर्थ यात्री काटेज के लिये 5-5 हजार वर्ग फीट एवं श्रीराम पेनोरामा के लिए 2 हैक्टेयर जमीन की मांग जिला प्रशासन से की गई है। पर अगस्त 2018 में दिए गए प्रस्ताव पर आज तक जिला प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा सका है और इन निर्माण कार्यों के लिये जमीन का आवंटन नहीं हो सका है।

सरकारी जमीन को कर दिया निजी
बताया गया है कि यहां के तत्कालीन राजस्व अमले ने गैस गोदाम के पास की शासकीय जमीन को बिना वैधानिक आदेश के ही निजी स्वत्व में कर दिया है। जानकारों का कहना है कि आराजी क्रमांक 291 से लगी जमीन जो कि शासकीय जमीन थी उसे फर्जी तरीके से आवंटन में होना बताया गया है। जबकि उस आवंटन के न तो कोई वैधानिक आदेश है और न ही इस संबंध में कलेक्टर से परमिशन ली गई है। इसी हकीकत दायरा पंजी की विस्तृत जांच से होगी लेकिन यहां अब भू-माफिया द्वारा व्यापक पैमाने पर जमीन की खरीद फरोख्त किया जा रहा है।

तीनों नक्शे गायब
बताया गया है कि जमीन कारोबारियों की मिली भगत से धर्मनगरी के इस नक्शे में बड़ी साजिश की गई है। इन नंबरों से संबंधित नक्शे की मूल सीट अब न तो पटवारी के पास है और न ही जिला रिकार्ड रूम में यह शीट मौजूद है। इतना ही नहीं यह शीट सीएलआर कार्यालय में भी मौजूद नहीं बताई जा रही है। गोदावरी से आगे उत्तर प्रदेश के सीमाई इलाके की 20 एकड़ की जमीन में बड़े खेल को अंजाम दिया गया है।

नक्शे से आराजी नंबर गायब होना बड़ा मामला है। इस संबंध में वस्तु स्थिति पता की जाएगी। अगर ऐसा पाया जाता है तो आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
- ओम नारायण सिंह, एसडीएम

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