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रालेगण सिद्धि: मंत्री से मिलने के बाद अन्ना हजारे ने रद्द की भूख हड़ताल, कहा- लोकपाल पर हो रहा काम

अनशन पर बैठने से पहले पीएम मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि पिछले चार साल में सरकार टाल-मटोल का रवैया अपनाती रही और लोकपाल या लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की।

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Dhirendra Kumar Mishra

Oct 02, 2018

anna

रालेगण सिद्धि: मंत्री से मिलने के बाद अन्ना हजारे ने रद्द की भूख हड़ताल, कहा- लोकपाल पर हो रहा काम

नई दिल्‍ली। समाजसेवी अन्ना हजारे ने मोदी सरकार के खिलाफ अपनी प्रस्‍तावित भूख हड़ताल को रद्द कर दिया है। इस बात की घोषणा करने से पहले वह महाराष्‍ट्र सरकार के मंत्री गिरिश महाजन से मिले थे। मुलाकात के बाद उन्‍होंने कहा कि मोदी सरकार लोकपाल बिल पर काम कर रही है। अन्ना हजारे ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार ने लोकपाल को लागू करने की तरफ पॉजिटिव अप्रोच के साथ काम किया है। उन्होंने इसके लिए सर्च कमेटी भी बनाई है। इसके अलावा किसानों के मुद्दे पर अन्ना ने कहा कि सरकार की ओर से समर्थन मूल्‍य बढ़ाया गया है। सरकार ने आश्‍वासन दिया है कि सरकार इस दिशा में अभी और सार्थक कदम उठाने की योजना पर काम कर रही है।

आंदोलन की पैदाइश है मोदी सरकार
करीब एक सप्‍ताह पहले अन्‍ना ने इस अनशन की घोषणा की थी। उन्‍होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार लोकपाल आंदोलन के कारण केन्द्र की सत्ता में आई थी। लेकिन मोदी सरकार ने अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं की है। इसलिए वो अक्तूबर से भूख हड़ताल शुरू करने के अपने फैसले पर अटल हैं। हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि पिछले चार साल में सरकार टाल-मटोल का रवैया अपनाती रही और लोकपाल या लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की। हजारे ने लिखा कि लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए 16 अगस्त, 2011 को समूचा देश सड़कों पर उतर आया था। आपकी सरकार इसी आंदोलन की वजह से सत्ता में आई।

सरकार को किसानों की फिक्र नहीं
मीडिया से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य नहीं देने का आरोप भी केंद्र सरकार पर लगाया। जिसके चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि किसानों की स्थिति बदतर होती जा रही है। सरकार को किसानों की फिक्र नहीं है।

2011 में मिला था अपार समर्थन
आपको बता दें कि 2011 में दिल्‍ली के रामलीला मैदान में लोकपाल और भ्रष्‍टाचार उन्‍मूलन को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। उनके आंदोलन को जनता का अपार समर्थन मिला था। उनके आंदोलन से घबराकर केंद्र सरकार ने जनलोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए झटपट एक समिति की घोषणा की। उसने 16 अगस्त से पहले संसद में एक मजबूत लोकपाल विधेयक पास कराने पर भी सहमति प्रकट कर दी। उसके बाद उन्‍होंने अपना अनशन समाप्त घोषित कर दिया था।