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हेट स्पीच केस में आजम खां को बड़ा झटका, रामपुर कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सुनाई दो साल की सजा, जानें पूरा मामला

Azam Khan: भड़काऊ भाषण देने के मामले में आजम को सजा होने के बाद एक फिर उनकी मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। आजम फिलहाल जमानत पर बाहर हैं लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर उनके हालात बदल सकते हैं।

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लखनऊ

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Prashant Tiwari

Jul 15, 2023

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समाजवादी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। लोकसभा चुनाव के दौरान CM योगी और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को लेकर पूर्व मंत्री ने विवादित बयान दिया था। इसी केस में कोर्ट ने आज उन्हें दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और 2500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। उनके खिलाफ यह केस 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज हुआ था। इस मामले में आजम को कोर्ट तीन साल तक की सजा सुना सकती थी।

18 अप्रैल 2019 को दिया था विवादित बयान

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान रामपुर से सपा के टिकट से प्रत्याशी थी। 18 अप्रैल 2019 को धमारा गांव में जनसभा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्‍यमंत्री, रामपुर के तत्‍कालीन डीएम और चुनाव आयोग को लक्ष्‍य करके विवादित बयान दिया था। इस मामले में आजम खान की ओर से बहस की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। लम्‍बी सुनवाई के बाद कोर्ट ने 15 जुलाई को फैसले की तारीख मुकर्रर की थी। इससे पहले भड़काऊ भाषण के एक अन्‍य मामले में आजम खान को राहत मिल चुकी है। शनिवार को अदालत ने उन्‍हें दोषी करार देते हुए उनकी उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया।

जमानत पर बाहर हैं आजम खान

भड़काऊ भाषण देने के मामले में आजम को सजा होने के बाद एक फिर उनकी मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। आजम फिलहाल जमानत पर बाहर हैं लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर उनके हालात बदल सकते हैं। इस बीच पिछले दो दिन से आजम खान की वाई श्रेणी की सुरक्षा हटाए जाने और फिर लौटाए जाने को लेकर यूपी की सियासत गर्म रही।


पहले भी आजम खां को हो चुकी है सजा

आजम खां को इससे पहले 27 अक्टूबर 2022 को आजम खां को भड़काऊ भाषण के एक अन्य मामले में सजा हो चुकी है। यह मामला मिलक कोतवाली में दर्ज हुआ था। तब एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। उन्होंने सजा के खिलाफ एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील की थी। वहां से उन्हें राहत मिल गई थी। सजा के फैसले को अदालत ने निरस्त कर दिया था।

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