
अभिषेक सिंघल
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में महिला मतदाता अब निर्णायक भूमिका में आ चुकी हैं। पिछले पच्चीस साल के चुनावी आंकड़ों को देखें तो पिछले पंद्रह सालों में महिला मतदाताओं का साइलेंट वोट ही से ‘डिसाइडिंग फैक्टर’ रहा है। जहां एक समय महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कम थी, वहीं अब वे न केवल बराबरी पर हैं बल्कि आगे भी निकल चुकी हैं। इसी कारण पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल दोनों की ही नजर महिला मतदाताओं पर है।
पश्चिम बंगाल में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले 15 सालों में बढ़ा है। 1996 और 2001 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से काफी कम रहा था। 1996 के विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या करीब 2.16 करोड़ थी, जबकि पुरुष मतदाता 2.39 करोड़ थे। उस समय महिला मतदान प्रतिशत 81.92% था, जो पुरुषों के 83.86% से कम था। 2001 में भी यह अंतर बना रहा, जब महिला मतदान 72.53% और पुरुष 77.83% दर्ज किया गया।
2006 के बाद से तस्वीर बदलनी शुरू हुई। 2006 में महिला मतदान 80.75% तक पहुंचा और पुरुषों के करीब आ गया। इसके बाद 2011 चुनाव एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ, जब महिला मतदान 84.45% रहा और पहली बार पुरुषों के 84.33% से आगे निकल गया। इस चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोर्चा की सरकार के लम्बे शासन को खत्म कर सरकार बनाई। 2016 और 2021 के चुनावों में यह ट्रेंड और स्पष्ट हो गया। 2016 में महिलाओं का मतदान 83.13% रहा, जो पुरुषों के 82.23% से अधिक था। 2021 में भी महिलाओं ने 81.75% मतदान के साथ पुरुषों 81.37% को पीछे छोड़ा। लोकसभा चुनावों में भी यही ट्रेंड देखने को मिला।
संख्या के लिहाज से भी महिला मतदाता तेजी से बढ़ी हैं। 1996 में जहां महिला मतदाता 2.16 करोड़ थीं, वहीं 2021 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 3.59 करोड़ हो गई। इस दौरान कुल मतदाता संख्या भी 4.56 करोड़ से बढ़कर 7.34 करोड़ तक पहुंच गई, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार मजबूत हुई। इस बार एसआईआर में बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद अब कुल 6 करोड़ 82 लाख 51 हजार 08 मतदाता हैं, जिनमें महिला मतदाता करीब 3 करोड़ 33 लाख हैं।
महिलाओं ने 2021 के विधानसभा चुनाव में पुरुषों के मुकाबले दमदम उत्तर, कालचीनी, मादुरीहाट, नगराकटा, दार्जिलिंग, कुर्सियांग, चकुलिया, इंग्लिश बाजार, शमशेरगंज, सुती, कांडी, बहरामपुर, नैहाटी, नोआपारा, खार्डाहा, पनिहाटी, बारानगर, दमदम, बिधाननगर, राजरहाट-गोपालपुर,बारासात, बरूईपुर पश्चिम, सोनारपुर दक्षिण, जादवपुर, पांडुआ, चांडीतला,जांगीपारा, हारीपाल, धानैखली, आरामबाग, खानाकुल, पांस्कुरा पश्चिम, रामनगर, ईगरा, डांतन, डेबरा, दासपुर, घाटल, मानबाजार, रघुनाथगंज, गोलपोखर, लालगोला और खानाकुल सीटों पर ज्यादा मतदान किया।
महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 से ही लागू करने और लोकसभा व विधानसभा की सीटों को पचास प्रतिशत बढ़ा कर परिसीमन करने का संविधान संशोधन विधेयक संसद के विशेष सत्र में पारित नहीं हो सका। राजनीतिक दलों ने पांच राज्यों के चुनावो के दौरान विशेष सत्र बुलाने पर आपत्ति जताई थी।
महिला मतों की बंगाल में बढ़ती भागीदारी के कारण टीएमसी और भाजपा में महिलाओं को लुभाने की होड़ लगी है। टीएमसी के शासन में बंगाल में लक्ष्मीर भंडार योजना, कन्या श्री, रूपा श्री योजना के तहत महिलाओं को डायरेक्ट कैश बेनीफिट की योजनाएं चलाई जाती हैं। टीएमसी ने इनमें बढ़ोतरी की घोषणा की है। वहीं भाजपा ने भी इस बार के घोषणा पत्र में महिलाओं को तीन हजार रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
| चुनाव वर्ष | महिला | पुरुष | कुल | महिला मतदान% | पुरुष मतदान% |
| 1996 | 21624530 | 23994602 | 45619132 | 81.92% | 83.86% |
| 2001 | 23353641 | 25329254 | 48682895 | 72.53% | 77.83% |
| 2006 | 22919517 | 25245684 | 48165201 | 80.75% | 82.34% |
| 2011 | 26748122 | 29535335 | 56283457 | 84.45% | 84.33% |
| 2016 | 31842992 | 34095257 | 65939006 | 83.13 % | 82.23% |
| 2021 | 35935622 | 37477580 | 73414746 | 81.75% | 81.37% |
Published on:
22 Apr 2026 04:29 pm
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