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UCC के मुद्दे पर केंद्र को मिला केरल के राज्यपाल का साथ, बोले- यूसीसी से मुसलमानों को फायदा होगा

UCC: एक सेमिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इस बात पर जोर दिया कि यूसीसी का एकमात्र मकसद सभी के लिए एक समान कानून है।

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देश में इस समय UCC को लेकर बहस तल रही है। एक तरफ जहां AIMPLB और कई मुस्लिम नेता इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं, कई पार्टियां और मुस्लिम नेता सरकार का समर्थन भी कर रहे है। UCC के मुद्दे पर केंद्र सरकार को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का साथ मिला है। उन्होंने कहा कि देश में UCC केवल केंद्र सरकार लागू कर सकती है। बता दें कि केरल के राज्यपाल अपने मुखर आवाज के लिए जाने जाते है। उन्होंने शाह बानो मामले से निपटने के लिए राजीव गांधी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।

देश में कानून संहिताबद्ध नहीं है- आरिफ मोहम्मद खान

आरिफ मोहम्मद खान ने ''समान नागरिक संहिता-समय की जरूरत?'' पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही। केरल के राज्यपाल ने आगे कहा, “मेरी राय के अनुसार, हमारे देश में कानून संहिताबद्ध नहीं है बल्कि घोषणात्मक है और विवाह और गोद लेने जैसे विषय धार्मिक कानूनों पर आधारित होने चाहिए। लेकिन अंग्रेजों ने कभी इस बात पर जोर नहीं दिया कि ये धार्मिक कानून क्या होंगे।”

तीन तलाक पर कानून बनने के बाद 69 प्रतिशत की कमी

सेमिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इस बात पर जोर दिया कि यूसीसी का एकमात्र मकसद सभी के लिए एक समान कानून है। खान ने ट्रिपल तलाक जैसे अन्य प्रासंगिक कानूनों को सामने लाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप 2019 में इसे लागू किए जाने के बाद से मुस्लिम महिलाओं के बीच तलाक की दर में 69% की गिरावट आई है।

UCC के नाम पर भोले भाले मुसलमानों को बहकाया जा रहा

इस दौरान राज्यपाल खाने ने उन लोगों की भी आलोचना की जिन्होंने दावा किया था कि यदि यूसीसी लागू किया जाता है, तो मुसलमान शादी नहीं कर पाएंगे और अपने शवों को दफन नहीं कर पाएंगे और यह मुसलमानों पर जबरदस्ती थोपा जाने वाला एक हिंदू कानून है। इन आरोपों पर उन्होंने कहा, “1937 का मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, अनुच्छेद 370 के कारण कश्मीर के लिए लागू नहीं था, लेकिन कानून के अनुसार कश्मीर के मुसलमान अभी भी मुसलमान थे।

गोवा में यूसीसी पहले ही लागू हो चुका है लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि अगर यूसीसी लागू हुआ तो मुसलमान न तो शादी कर पाएंगे और न ही अपने शव को दफना पाएंगे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि यह एक हिंदू कानून है जो मुसलमानों पर थोपा जा रहा है। लेकिन हिंदू कानून हिंदुओं पर भी लागू नहीं होता है और उनके धर्म में तलाक की कोई अवधारणा नहीं है।

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