
नई दिल्ली। जस्टिस केएम जोसफ को सुप्रीम कोर्ट में जज न नियुक्ति करने का मामला पहले से ज्यादा पेचीदा होता जा रहा है। अब महाराष्ट्र के सेवानिवृत जिला जज जीडी इनामदार ने केंद्र के रवैये के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस जोसफ और इंदु मल्होत्रा के लिए कोलेजियम की सिफारिशों को अलग करने की सरकार की कार्रवाई को असंवैधानिक और मनमानी करार दिए जाने की मांग की गई है। याचिका में इस बात का भी जिक्र है कि न्यायपालिका की संस्थानिक स्वतंत्रता और अखंडता को बचाए रखना बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार न्यायपालिका की आजादी को दबाना चाहती है। आपको बता दें कि कानून मंत्रालय ने तीन आधार गिनाते हुए जस्टिस जोसेफ की पात्रता पर सवाल उठाया है।
कोलेजियम की सिफारिश पर अमल करे सरकार
सेवानिवृत जज जीडी इनामदार ने याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वो जस्टिस केएम जोसफ मामले में केंद्र सरकार को कोलेजियम की सिफारिश को जल्द लागू करने का आदेश दे। चार महीने पहले भेजी सिफारिश को मानते हुए सरकार जस्टिस जोसफ को फौरन सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने को अपनी मंजूरी दोबारा दे। साथ ही केंद्र सरकार को इस बात का भी आदेश दिया जाए कि वो भविष्य में कोलेजियम की सिफारिशों को बिना कोलेजियम की सहमति के अलग-अलग न करे। कोर्ट केंद्र सरकार को यह आदेश भी दे कि एमओपी यानी मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के फाइनल होने तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर कोलेजियम की सिफारिशों पर सरकार तय समय सीमा में कार्रवाई करेगी।
इससे पहले कई जज उठा चुके हैं सवाल
सुप्रीम कोर्ट के कई मौजूदा और पूर्व जज इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। पहले जस्टिस चेलमेश्वर फिर जस्टिस कुरियन जोसफ और पिछले हफ्ते जस्टिस मदन बी लोकुर ने भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बचाने और सरकार की मनमानी रोकने के उपाय करने पर जोर दिया। इन उपायों की तलाश के लिए फुलकोर्ट यानी सभी जजों की मीटिंग बुलाने की मांग की। कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं दिए जाने पर भी मोदी सरकार पर हमला बोला। दूसरी तरफ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कहना है कि कानून कहता है कि सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम जो चाहेगा वही होगा। दूसरी तरफ सरकार की मंशा से साफ है कि वह जस्टिस जोसेफ को जज नहीं बनने देना चाहती है। ऐसा इसलिए कि जस्टिस जोसेफ ने 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्र की सिफारिश को अमान्य करार दिया था।
Published on:
04 May 2018 10:49 am
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