
भोपाल. गायत्री शक्तिपीठ ने केन्द्रीय जेल के बंदियों को सकारात्मक विचारों को उभारने का मौका दिया तो बंदियों ने भी इसमें उत्साह से भाग लिया और तीन सालों में एक करोड़ से अधिक मंत्र लिख डाले। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से शुक्रवार को हरिद्वार से आए अतिथियों की उपस्थिति में गायत्री मंत्र लेखन की 24 हजार पुस्तिकाओं के प्रतीक केंद्र, विचार क्रांति स्तंभ का लोकार्पण किया गया।
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या दंपत्ति की उपस्थिति में शुक्रवार को केंद्रीय जेल भोपाल में तीन वर्षों से केंद्रीय में जेल चलाए जा रहे मंत्र लेखन अभियान के अंतर्गत बंदी भाई- बहनों द्वारा लिखी गईं, 24 हजार गायत्री मंत्र लेखन पुस्तिकाओं की शोभा यात्रा निकाली गई। पुस्तिकाओं को एक रथ पर खा गया, साथ ही पीत वस्त्र पहने बंदियों ने इन्हें सर पर भी रखकर गरिमामय शोभा यात्रा निकाली।
जेल अधीक्षक एवं अधिकारियों ने किया लोकार्पण
केंद्रीय जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे एवं जेल प्रशासन के अधिकारियों और गायत्री परिवार खंडेलवाल परिवार, भोपाल के गायत्री परिवार एवं हजारों की संख्या में केंद्रीय जेल के बंदी भाइ-बहनों की उपस्थिति में पुस्तिकाओं के प्रतीक केंद्र, विचार क्रांति स्तंभ का लोकार्पण किया। मंत्र लेखन की पूर्णाहुति पर 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ केंद्रीय जेल के बंदी भाइयों-बहनों एवं अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा संपन्न किया गया।
मंत्र लेखन से आए सकारात्मक बदलाव: डॉ. चिन्मय पंड्या
इस अवसर पर कई कैदी भाइयों ने गायत्री मंत्र लेखन के लाभ, सकारात्मक सोच में बदलाव आदि संस्मरण सुनाए। डॉ. चिन्मय पंड्या ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कई उदाहरणों के माध्यम से बंदियों उनकी सोच विचार में परिवर्तन लाने का एवं योग प्राणायाम के बारे में समझाया, शेफाली पंड्या ने हम बदलेंगे युग बदलेगा हम सुधरेंगे युग सुधरेगा के आधार पर व्यक्ति निर्माण परिवार निर्माण पर जोर दिया।
Published on:
11 Dec 2021 09:45 am
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