
Deputy chairman of Rajya sabha
नई दिल्ली। राज्य दर राज्य सत्ता से दूर हो रही कांग्रेस से अब राज्यसभा के उपसभापति का पद भी छिन सकता है। यदि ऐसा हुआ तो 41 साल बाद यह पद कांग्रेस मुक्त होगा। फिलहाल इस पद पर कांग्रेस नेता पीजे कुरियन पदस्थ हैं, लेकिन वे इस साल जुलाई में रिटायर हो जाएंगे। 1977 से लगातार कांग्रेस नेता ही पद को संभाल रहे हैं। इसके साथ ही यह पहला मौका होगा जब संसद के चारों उच्च पदों में से किसी पर भी कांग्रेस का नेता नहीं होगा।
ऐसे होता है उपसभापति का चयन
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। उनकी अनुपस्थिति में उनकी जिम्मेदारी उपसभापति निभाते हैं। राज्यसभा के उपसभापति का चयन सदन में आंतरिक रूप से किया जाता है। उच्च सदन के सदस्य अपने में से ही किसी एक को उपसभापति नियुक्त करते हैं। राज्यसभा उपाध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल का होता है। इस अवधि के पूर्व भी त्यागपत्र देकर वे पद से अलग हो सकते हैं। राज्यसभा प्रस्ताव पास कर उपसभापति को पद से हटा भी कर सकती है, परन्तु ऐसे प्रस्ताव पर लोकसभा की स्वीकृति भी जरूरी होती है। उपसभापति राज्यसभा का सदस्य न रहने पर स्वयं त्यागपत्र देने या पद से हटाए जाने पर अपने पद पर नहीं रहेगा। सदन में अयोग्यता अथवा अविश्वास का प्रस्ताव पास कर उपसभापति को पद से हटाया जा सकता है। लेकिन इस प्रस्ताव की सूचना 14 दिन पहले देना जरूरी है।
41 साल तक इन कांग्रेसी नेताओं ने संभाली बागडोर
1977-1980 : रामनिवास मिर्धा
1980-1984 : श्यामलाल यादव
1985-1986 : नजमा हेपतुल्ला (नोट- 2004 से बीजेपी में हैं)
1986 (फरवरी से अक्टूबर) : एमएम जैकब
1986-1988 : प्रतिभा पाटिल
1988-2004 : नजमा हेपतुल्ला (नोट- 2004 से बीजेपी में हैं)
2004-2012 : के रहमान खान
2012 से अब तक : पीजे कुरियन
संसद के चारों उच्च पदों पर अभी कौन-कौन
| पद | पदाधिकारी | पार्टी |
| लोकसभा स्पीकर | सुमित्रा महाजन | बीजेपी |
| राज्यसभा सभापति | वेंकैया नायडू | बीजेपी |
| लोकसभा डिप्टी स्पीकर | एम थंबीदुरई | एआईडीएमके |
| राज्यसभा उपसभापति | पीजे कुरियन | कांग्रेस (जुलाई 2018 तक) |
Published on:
29 Mar 2018 05:34 pm
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