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Resign in Congress: सूरजपुर कांग्रेस में ये क्या हो रहा? पूर्व सांसद की बहू समेत 10 पदाधिकारियों ने नियुक्ति के 3 दिन बाद ही दिया इस्तीफा

Resign in Congress: कांग्रेस का अंतर्कलह आया सामने, संगठन में लगातार बढ़ता ही जा रहा असंतोष, नहीं थम रही गुटबाजी, 9 फरवरी को जिला स्तर के पदाधिकारियों की हुई थी नियुक्ति

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Resign in congress

Resignation letter by Usha Singh (Photo- Patrika)

सूरजपुर। जिला कांग्रेस कमेटी सूरजपुर में संगठनात्मक अस्थिरता एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। 9 फरवरी को जिला स्तर पर कई पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई, लेकिन 12 फरवरी से अचानक इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। महज़ तीन दिन के भीतर पूर्व सांसद की बहू समेत 10 पदाधिकारियों के इस्तीफे (Resign in Congress) ने संगठन के भीतर गहराते असंतोष और नेतृत्व संकट की चर्चाओं को तेज कर दिया है।

इस्तीफा (Resign in Congress) देने वालों में जिला उपाध्यक्ष नियुक्त की गईं उषा सिंह भी शामिल हैं। उषा सिंह कोई सामान्य कार्यकर्ता नहीं हैं। वे सरगुजा के पूर्व सांसद एवं प्रेमनगर विधानसभा के पूर्व विधायक स्व. खेलसाय सिंह की बहू हैं तथा स्वयं पूर्व जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। इतना ही नहीं, वे वर्तमान जिलाध्यक्ष शशि सिंह की रिश्तेदार भी बताई जाती हैं।

उनका सामाजिक और राजनीतिक आधार मजबूत माना जाता है। साथ ही सरगुजा राजपरिवार एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव से उनकी निकटता उनके राजनीतिक कद (Resign in Congress) को और प्रभावशाली बनाती है। ऐसे में नियुक्ति के 3 दिन बाद उनका इस्तीफा कई सवाल खड़े करता है।

इस्तीफा (Resign in Congress) देने वालों में उषा सिंह के अलावा सचिव पुष्पेंद्र सिंह, महामंत्री राजेंद्र गुर्जर, संयुक्त महामंत्री गोरखनाथ पाठक, संयुक्त महासचिव शिव नारायण गुप्ता, महामंत्री बिजेंद्र गोयल, सचिव पवन दीवान, संयुक्त महामंत्री सरिता सिंह तथा कार्यकारिणी सदस्य सरोज माणिकपुरी व भावना सिंह शामिल हैं। एक साथ इतने पदाधिकारियों के त्यागपत्र से जिला संगठन में समन्वय और संवाद की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में अंदरूनी असंतोष की चर्चा

वर्तमान जिलाध्यक्ष शशि सिंह जो पूर्व मंत्री तुलेश्वर सिंह (Resign in Congress) की पुत्री हैं, इनके नेतृत्व को लेकर पहले भी अंदरूनी असंतोष की चर्चाएं होती रही हैं। संगठन के भीतर यह धारणा बन रही है कि निर्णय प्रक्रिया सीमित दायरे में सिमटती जा रही है और वरिष्ठ व प्रभावशाली नेताओं को अपेक्षित भूमिका नहीं मिल पा रही।

उषा सिंह सहित आधा दर्जन पदाधिकारियों का इस्तीफा इस धारणा को और मजबूत करता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सूरजपुर जैसे जिले में जहां सामाजिक समीकरण और पारिवारिक-राजनीतिक प्रभाव अहम भूमिका निभाते हैं, वहां संगठन के भीतर बढ़ती अंतर्कलह पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकती है।

प्रदेश नेतृत्व पर टिकीं निगाहें

लगातार हो रहे इस्तीफों (Resign in Congress) के बाद अब निगाहें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर टिकी हैं। क्या वह इस घटनाक्रम को गंभीर संकेत मानते हुए जिला संगठन और नेतृत्व शैली की समीक्षा करेगा, या फिर यह असंतोष भीतर ही भीतर सुलगता रहेगा। स्पष्ट है कि ये इस्तीफे केवल पद त्याग भर नहीं हैं, बल्कि सूरजपुर कांग्रेस में संगठनात्मक संतुलन और नेतृत्व की कार्यशैली पर खड़ा हुआ एक बड़ा सवाल है।

Resign in Congress: तालमेल की कमी

हालांकि कुछ इस्तीफों (Resign in Congress) में स्वास्थ्य कारणों का उल्लेख किया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे संगठनात्मक तालमेल की कमी और नेतृत्व से संवाद के अभाव से जोडक़र देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि नियुक्ति के तुरंत बाद ऐसी स्थिति बनती है तो यह निर्णय प्रक्रिया और आंतरिक संतुलन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।