मंदसौर.
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में अंतिम तिथि आज है और अब तक सरकारी खरीदी के लिए किसानों में रुचि नहीं दिख रही है। गेहूं के अलावा चना, सरसों व मसूर का भी यही हाल है। पिछले साल के आंकड़ों को देखे तो आधे किसानों ने भी इस बार पंजीयन नहीं कराया है। जिले के १२ हजार ९५९ किसानों ने गेहूं के लिए पंजीयन कराया है, जबकि पिछली बार ४१ हजार गेहूं में पंजीयन हुए थे। गेहूं के साथ चना, मसूर व सरसों में मिलाकर ४४ हजार से अधिक ने पंजीयन कराया था और इस बार १५ हजार ९७२ ही अब तक पंजीयन किसानों के हुए है। ऐसे में आंकड़ों को देखे तो बाजार व मंडियों में मिल रहे अधिक दाम के कारण किसानों का सरकारी खरीदी से मोहभंग हो चुका है। पंजीयन अवधि पूरी आज हो रही है। ऐसे में अब प्रशासन व विभाग का अमला उपार्जन की तैयारियों में जुट गया है। मार्च माह में उपार्जन होना है। इस बार पर्याप्त बारिश होने के चलते गेहूं का रकबा बढ़ा लेकिन पंजीयन नहीं बढ़े। ओलावृष्टि से रबी सीजन की फसलों में नुकसान हुआ है लेकिन अब मौसम साफ होने के बाद फिर से फसल निकालने में किसान लग गए है। वहीं गेहूं का बंपर उत्पादन की उम्मीद को लेकर किसान खेतों में फिर से जुट गए है।
अंतिम दिनों में आई तेजी फिर भी पंजीकृत की संख्या है कम
समर्थन मूल्य पर पंजीयन का दौर ६ फरवरी से जिले में ७७ केंद्रों पर शुरु हुआ। २८ फरवरी तक पंजीयन होना है। २११५ रुपए प्रति क्विंटल में गेहूं का उपार्जन होगा जबकि बाजार में २६०० के आसपास दाम चल रहे है। इसी कारण सरकारी खरीदी में किसान रुचि नहीं दिखा रहे है। मंडी में गेहूं से लेकर चने का अधिक दाम मिलने के कारण किसान पंजीयन करने और सरकारी खरीदी में रुचि नहीं दिखा रहे है। जिले में दो लाख से अधिक किसान है लेकिन अब तक १५ हजार ९७२ ने पंजीयन कराया है, जबकि पिछले साल आंकड़ा ४४ हजार था तो उसके पहले यह आंकड़ा ३६ हजार था। ऐसे में इस बार पंजीकृत किसानों की संख्या आधी भी नहीं हुई है। जितने किसान है उसकी अपेक्षा में कमी है। वहीं चना से लेकर सरसों व मसूर के पंजीयन का दौर भी जारी है। इस बार गेहूं का रकबा अधिक होने के कारण उत्पादन भी बंपर होने का अनुमान है लेकिन किसानों को सरकारी खरीदी के बजाए मंडी में गेहूं बेचने में अधिक रुचि है।
१५ हजार ने ही कराया है पंजीयन
रबी सीजन में उपार्जन के लिए अब तक १५ हजार ९७२ किसानों ने ही पंजीयन कराया है। पिछले साल यह आंकड़ा ४४ हजार ३२५ था। वहीं गेहूं में इसबार १२ हजार ९५९ पंजीयन हुए तो गत वर्ष ४१ हजार ३७० पंजीयन हुए थे। वहीं चने में इस बार ७१९१ पंजीयन हुए तो गत वर्ष यह संख्या १२७८४ थी। मसूर में १९९५ ने पंजीयन कराया था लेकिन इस बार ९१५ किसानों ने ही अब तक पंजीयन कराया है। वहीं सरसो में ४७१६ पंजीयन पिछले साल हुए थे लेकिन इस बार १०२५ पंजीयन ही हो पाए है। इसकी बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि समर्थन से ज्यादा दाम किसानों को मंडी में या खुले बाजार में उपज के मिलते है। ऐसे में वह समर्थन की अपेक्षा मंडी या बाजार में फसल बेचना अधिक पसंद करते है। इसके अलावा वहां नगद राशि भी मिलती है। हालांकि पंजीयन का दौर चल रहा है। इसके बाद उपार्जन की तैयारियां भी तेज होगी।