
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: IANS)
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों के बाद शहर के अगले मेयर को लेकर जारी सस्पेंस के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा बयान दिया है। शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई में भाजपा-शिवसेना गठबंधन (महायुति) का ही मेयर बनेगा। उनके इस बयान ने विपक्षी खेमे, खासकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिसमें वे नए राजनीतिक समीकरण बनने की आस लगाए बैठे थे। ताकि बीएमसी पर उनका ही शासन बना रहे।
सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई की जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन पर विश्वास जताया है और वे इस जनादेश के खिलाफ कभी नहीं जाएंगे। उन्होंने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें महायुति के भीतर दरार या नए समीकरणों की चर्चा हो रही थी।
शिंदे ने दो टूक कहा कि बीएमसी या राज्य के किसी भी नगर निकाय में नए राजनीतिक समीकरण बनने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा, "शिवसेना और भाजपा ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था, इसलिए मुंबई के साथ-साथ ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर जैसे नगर निकायों में भी महायुति के ही मेयर नियुक्त किए जाएंगे।"
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक आलीशान होटल में शिफ्ट किए जाने पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए शिंदे गुट ने कहा कि यह कोई किलेबंदी नहीं है, बल्कि नए सदस्यों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यशाला है। इसका उद्देश्य नवनिर्वाचित पार्षदों को बीएमसी के कामकाज से परिचित कराना और पार्टी प्रमुख शिंदे द्वारा उन्हें भावी अपेक्षाओं के बारे में बताना है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे का यह जन्म शताब्दी वर्ष है, इसलिए एकनाथ शिंदे कम से कम पहले ढाई साल के लिए अपनी पार्टी का मेयर चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, शिंदे जानते हैं कि उनकी पार्टी की सीटें (29) भाजपा (89) से काफी कम हैं, फिर भी वे अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी शर्तों पर पीछे नहीं हट रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ संकेत दिया कि वे गठबंधन की मर्यादा नहीं तोड़ेंगे।
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को एक बयान में उम्मीद जताई थी कि ईश्वर की इच्छा हुई तो मुंबई में उनका मेयर बन सकता है। पिछले ढाई दशक से बीएमसी पर राज करने वाली अविभाजित शिवसेना के लिए इस बार स्थिति अलग है। इस बार जनादेश ने उन्हें बीएमसी की सत्ता से दूर कर दिया। हालांकि उद्धव की पार्टी ने 65 सीटें जीतकर खुद को भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी साबित किया है, लेकिन महायुति के पास 118 का स्पष्ट बहुमत होने के कारण उनका सत्ता में वापसी का सपना फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है।
बीएमसी चुनाव परिणामों की बात करें तो भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं। इस तरह 227 सदस्यीय बीएमसी में महायुति को मामूली बहुमत हासिल हुआ। वहीं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) 65 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। जबकि उसकी सहयोगी राज ठाकरे की मनसे को 6 सीटों पर सफलता मिली। वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं। वहीं ओवैसी की एआईएमआईएम ने 8, अजित पवार की एनसीपी को तीन, समाजवादी पार्टी (सपा) को दो और एनसीपी (शरद पवार गुट) को एक सीट पर जीत हासिल हुई। अगर विपक्षी महाविकास आघाडी एकजुट होता है तो उसके पास कुल 106 सीटें होंगी। यह आंकड़ा बीएमसी में मेयर बनाने के लिए बहुमत से सिर्फ 8 सीट कम है।
Published on:
19 Jan 2026 08:57 pm

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