
चुनाव आयोग की मांग, वोटिंग से 48 घंटे पहले सोशल मीडिया और प्रिंट से प्रचार पर लगे रोक
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले जहां राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ी है वहीं चुनाव आयोग ने भी कमर कस ली है। खास बात यह है कि चुनाव में आचार संहिता को लेकर चुनाव आयोग के बड़ा कदम उठाया है। इस कदम के बाद माना जा रहा है कि राजनीतिक दलों पर खासा असर पड़ सकता है। दरअसल चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद 126 में संसोधन करके इसका दायरा सोशल माडिया, इंटरनेट, केबल चैनल्स और प्रिंट मीडिया के ऑनलाइन संस्करणों तक बढ़ाने की बात कही है।
...तो होगी बड़ी कार्रवाई
जी हां अगर चुनाव आयोग का ये कदम सफल होता है तो राजनीतिक दलों को प्रचार नीति में बड़ा परिवर्तन करना होगा। आपको बता दें कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद 126, इलेक्शन साइलेंस की बात कहता है जिसके मुताबिक चुनाव वाले क्षेत्र में मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर रोक लगता है। साथ ही आयोग ने अधिनियम में अनुच्छेद 126 (2) भी जोड़ने की बात की है जिसके तहत इलेक्शन साइलेंस का दायरा बढ़ने के बाद उल्लंघन पर कार्रवाई हो पाएगी।
13 फरवरी को संसद का अंतिम सत्र
सरकार को यह बातें लगभग तीन हफ्ते पहले ही लिख कर इस पर जल्द विचार करने का आग्रह किया था, जिससे इसी वर्ष होने वाले आम चुनावों में इसे लागू किया जा सके। हालांकि अबतक कोई खास प्रगति नहीं देखी गई है। संसद का अंतिम सत्र 13 फरवरी को खत्म हो रहा है।
प्रिंट मीडिया भी हो दायरे में
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद 126 के अंतर्गत मतदान से 48 घंटे पहले जनसभा और टेलीविजन प्रचार पर रोक लगाता है। 17 जनवरी को कानून सचिव को लिखे पत्र में आयोग ने प्रिंट मीडिया को भी इसके अंदर लाने की बात कही थी। आयोग के मुताबिक वर्तमान में उम्मीदवार इलेक्शन साइलेंस के दौरान भी प्रिंट मीडिया के माध्यम से प्रचार करते हैं। कई बार तो यह मतदान के दिन भी जारी रहता है।
अनुच्छेद 126 (2) का दायरा बढ़ा तो दायरे में होंगे ये
- इंटरनेट (सोशल मीडिया)
- रेडियो
- टेलीविजन
- केबल चैनल
- प्रिंट मीडिया (पेपर, मैगजीन और प्लेकार्ड)
Updated on:
09 Feb 2019 10:52 am
Published on:
09 Feb 2019 09:48 am
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