
करुणानिधि के बाद डीएमके की कमान को लेकर स्टालिन-अलागिरी में जंग तेज, आपात बैठक जारी
नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर नया आकार लेने के मोड़ पर है। इस बार सियासी रार डीएमके प्रमुख रहे एम करुणानिधि के दोनों बेटों के बीच है। डीएमके प्रमुख करुणानिधि का कुछ दिन पहले निध हुआ था। उसके बाद से ही परिवार में एक बार फिर उत्तराधिकार का विवाद पैदा हो गया है। यही कारण है कि पार्टी के नए प्रमुख को लेकर डीएमके कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाई गई है।
पार्टी की कब्र न खोदें स्टालिन
पार्टी कार्यकारिणी की बैठक चेन्नई में जारी है। डीएमके प्रमुख के दोनों दावेदार व करुणानिधि के दोनों पुत्र अलागिरी और स्टालिन इस बैठक में पहुंच चुके हैं। पार्टी के वफादार कार्यकर्ता इस समय इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि प्रमुख पद का विवाद दोनों के बीच समाप्त हो जाए और इसका शांतिपूर्ण समाधान निकल जाए। करुणानिधि के बड़े बेटे एमके अलागिरी ने दावा किया कि पार्टी के सभी वफादार कार्यकर्ता उनके साथ हैं और यदि द्रमुक ने उन्हें वापस नहीं लिया तो वह अपनी ही कब्र खोदेगी। उन्होंने कहा कि डीएमके को सभी लोग मिलकर चलाएंगे और प्रदेश की जनता के हित में संघर्ष जारी रखेंगे।
करुणानिधि का निधन
आपको बता दें कि तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे और कलैगनार के नाम से मशहूर डीएमके प्रमुख मुथुवेल करुणानिधि का सात अगस्त शाम को चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल में निधन हुआ था। द्रविड़ आंदोलन की उपज एम करुणानिधि अपने करीब 6 दशकों के राजनीतिक करिअर में ज्यादातर समय राज्य की सियासत का एक ध्रुव बने रहे। वह 50 साल तक अपनी पार्टी डीएमके के प्रमुख बने रहे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी एम करुणानिधि तमिल भाषा पर अच्छी पकड़ रखते थे। उन्होंने कई किताबें, उपन्यास, नाटकों और तमिल फिल्मों के लिए संवाद लिखे। तमिल सिनेमा से राजनीति में कदम रखने वाले करुणानिधि करीब छह दशकों के अपने राजनीतिक जीवन में एक भी चुनाव नहीं हारे।
Published on:
14 Aug 2018 12:03 pm
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