महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि मुसलमान समुदाय को शिक्षा में आरक्षण मिलना चाहिए।
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को मराठा आरक्षण पर अपनी मुहर लगा दी। फडणवीस सरकार ने विधानसभा में मराठा आरक्षण बिल पेश किया जो कि ध्वनिमत से पारित हुआ। अब महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को शिक्षा और नौकरी में 16 फीसदी आरक्षण मिलेगा। लेकिन एक बार फिर से आरक्षण पर राजनीति शुरु हो गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि नौकरियों में आरक्षण देने पर पहले ही अदालत ने रोक लगा रखी है। हालांकि शिक्षा पर रोक नहीं है। इसलिए यह जरुरी है कि समाज के सबसे गरीब और पिछड़े समुदाय को इसका लाभ मिले। चौहान ने कहा कि समाज में मुसलमान समुदाय सबसे पिछड़ा है, लिहाजा उनके जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए शिक्षा में उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो सरकार की ओर से लाया जाने वाला अध्यादेश या बिल एक मजबूत पक्ष के हक में होगा। बता दें कि भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना ने भी मुस्लिमों और पिछड़े हुए लोगों को आरक्षण दिए जाने की मांग की है। शिवसेना ने कहा है कि गरीबों और पिछड़े हुए लोगों को न्याय और काम मिलना चाहुिए।
महाराष्ट्र में मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण
आपको बता दें कि गुरुवार को महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने 'स्पेशल कैटेगरी फॉर बैकवर्ड क्लासेज' (एससीबीसी) के तहत मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देने वाला बिल को सदन पेश किया जो कि ध्वनिमत से पास हो गया। अब मराठा समुदाय को शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में 16 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में 3 सिफारिशें की है। जिसमें एसईबीसी में मराठा समुदाय को स्वतंत्र आरक्षण दिए जाने संबंधि बात कही गई है। सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के बाद ही यह फैसला लिया है। इसे लागू करने के लिए कैबिनेट उप-समिति गठित की है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान में स्पष्ट नियम है कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने 'स्पेशल कैटेगरी फॉर बैकवर्ड क्लासेज' के प्रवाधान के तहत आरक्षण देने की घोषणा की है। बता दें कि सरकार ने बीते वर्ष जून 2017 में मराठा आरक्षण का मामला पिछड़ा वर्ग आयोग को सौंप दिया था। अब पिछड़ा वर्ग आयोग ने कहा है कि राज्य में मराठा समुदाय की समाजिक और शैक्षिक स्थिति ठीक नहीं है। साथ ही आर्थिक स्थिति भी बिगड़ी हुई है। इसी संबंध में आयोग ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण के पक्ष में सुझाव दिया है।