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शीतकालीन सत्र से पहले कल सुबह 11 बजे सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, शाम 4 बजे होगी एनडीए की मीटिंग

केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कल सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक के बाद एनडीए की एक अहम बैठक होगी, जिसमें सत्र के लिए रणनीति बनाई जाएगी।

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Nitin Singh

Nov 27, 2021

Government called all-party meeting at 11 am tomorrow

Government called all-party meeting at 11 am tomorrow

नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र 20 नवंबर से शुरू हो रहा है, इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कल सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी दलों के नेता शामिल होंगे। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। कल होने वाली इस सर्वदलीय बैठक के बाद शाम 4 बजे एनडीए की भी अहम बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में एनडीए सत्र के लिए रणनीति बनाएगी।

कृषि कानूनों पर हो सकती है चर्चा
हाल ही में केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि इन कानूनों के विरोध में किसान कई महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे थे। जानकारों का कहना है कि सरकार सर्वदलीय बैठक में कृषि कानूनों को लेकर चर्चा कर सकती है। इसके साथ ही इस बैठक में सभी दलों से शीतकालीन सत्र में शांति बनाए रखने और सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालने की बात कही है।

कांग्रेस ने बनाई रणनीति
बता दें कि संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने किसान आंदोलन, महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जमकर हंगामा किया था। इसके चलते संसद की कार्यवाही हर रोज स्थगित करनी पड़ी। वहीं अब विपक्ष शीतकालीन सत्र में भी केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कल कांग्रेस ने एक अहम बैठक भी की, जिसमें सत्र के लिए रणनीति तैयार की गई। बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने बताया कि हम संसद ने जनता के मुद्दे उठाएंगे और विपक्ष के एकजुट करने का प्रयास करेंगे।

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गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू हो रहा है। इस सत्र में कृषि कानूनों को रद्द करने से संबंधित विधेयक भी पेश किया जाएगा, जिस पर पूरे देश की नजरें बनी हुई हैं। इसके साथ ही सरकार अगले साल कई राज्यों में होने वाले चुनाव को देखते हुए कई अहम विधेयक पास कराने की योजना बना रही है। बता दें कि पिछले साल कोरोना महामारी के चलते संसद का शीतकालीन सत्र नहीं हुआ था, जिसको लेकर सरकार की खूब आलोचना भी हुई।