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दिल्ली से लौटते ही शिंदे ने कर दिया बड़ा खेला, उद्धव के 4 पार्षद, जिला प्रमुख शिवसेना में शामिल

Maharashtra Politics: बताया जा रहा है कि शिंदे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई। इस बैठक में महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों पर भी बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 18, 2026

Eknath Shinde Flight Davos

दिल्ली से लौटते ही एकनाथ शिंदे का बड़ा 'एक्शन' (Photo: IANS/File)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात करने के ठीक बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। देर रात दिल्ली से वापस लौटते ही उन्होंने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका दिया है। अकोला महानगरपालिका में ठाकरे गुट के कुल 6 में से 4 नगरसेवकों (पार्षद) ने शिंदे गुट की शिवसेना का दामन थाम लिया है।

आधी रात को 'नंदनवन' पर बड़ी सियासी हलचल

शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे मंगलवार को दिल्ली दौरे पर थे, जहां उन्होंने पीएम मोदी के साथ करीब डेढ़ घंटे तक राज्य के सियासी समीकरणों व अन्य मुद्दों पर चर्चा की। दिल्ली से मुंबई लौटने के बाद, रात करीब 2 बजे जब शिंदे अपने ठाणे स्थित आवास 'नंदनवन' पहुंचे, तो वहां अकोला के नेताओं का जमावड़ा पहले से मौजूद था। रात में ही शिंदे की उपस्थिति में अकोला के 4 पार्षदों ने शिवसेना का भगवा झंडा उठाया। इन चार पार्षदों के साथ-साथ उद्धव ठाकरे गुट के जिला प्रमुख मंगेश काले ने भी शिंदे सेना में प्रवेश किया है।

अकोला नगर निगम में उद्धव गुट बिखरा

अकोला नगर निगम में उद्धव ठाकरे गुट के कुल 6 पार्षद थे, जिनमें से 4 अब शिंदे के साथ जा चुके हैं। पार्टी छोड़ने वालों में न केवल पार्षद शामिल हैं, बल्कि जिला प्रमुख मंगेश काले जैसे कद्दावर नेता ने भी शिंदे सेना में प्रवेश किया है। खास बात यह है कि दल बदलने वाले पार्षदों में सुरेखा काले भी शामिल हैं, जो हाल ही में महाविकास अघाड़ी (MVA) की ओर से मेयर पद की उम्मीदवार रह चुकी थीं, जिन्हें वंचित बहुजन आघाड़ी का समर्थन प्राप्त था। इनके अलावा मनोज पाटिल, सागर भरुका और सोनाली सरोदे ने भी आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट की सदस्यता ग्रहण की है। अब अकोला नगर निगम में ठाकरे गुट के पास केवल दो पार्षद शेष रह गए हैं।

अकोला की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत

चार पार्षदों और जिला प्रमुख के अलविदा कहने से अकोला में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) पूरी तरह बिखरती दिख रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बड़ी टूट पर मातोश्री या उद्धव ठाकरे की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और वे अकोला में बचे हुए संगठन को कैसे बचाते हैं।