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IAS की नौकरी छोड़कर भाजपा से OP चौधरी लड़े चुनाव, हार की दहलीज पर हैं खड़े

ओपी चौधरी अघरिया समुदाय से आते हैं। छत्तीसगढ़ में इस समुदाय का अच्छा वर्चस्व है।

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IAS OP chaudhary

IAS की नौकरी छोड़कर भाजपा से OP चौधरी लड़े चुनाव, हार की दहलीज पर हैं खड़ा

नई दिल्‍ली। छत्तीसगढ़ में कलेक्‍टरी (आईएएस) की नौकरी छोड़कर ओपी चौधरी ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन किस्‍मत राजनीति में दगा दे गई। काउंटिंग जारी है और वो खरसिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्‍मीदवार से पीछे चल रहे हैं। चौधरी कांग्रेस उम्मीदवार उमेश पटेल से चार हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं। पटेल को अभी तक की मतगणना में 93,724 वोट तो ओपी चौधरी को 76,714 मत मिले हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ओपी चौधरी कांग्रेस उम्मीदवार को शिकस्त दे पाते हैं। अगर नहीं तो फिर वो क्‍या करेंगे?

अघरिया समुदाय से हैं चौधरी
दरअसल, ओपी चौधरी अघरिया समुदाय से आते हैं। छत्तीसगढ़ में इस समुदाय का अच्छा वर्चस्व है। खरसिया सीट से नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल वर्तमान विधायक हैं। खरसिया सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। चौधरी स्थानीय होने के साथ युवा आइकॉन के रूप में भी यहां लोकप्रिय हैं। अपने समुदाय के समर्थन और युवा चेहरे होने के कारण उन्‍होंने कलेक्‍टरी की नौकरी छोड़कर राजनीति में हाथ आजमाया लेकिन उनका ये दांव काम नहीं आया।

रमण के चहेते अधिकारी रहे हैं आईएएस अधिकारी
आपको बता दें कि आईएएस की नौकरी छोड़ने से पहले ओपी चौधरी रायपुर के कलेक्टर थे। इसके पहले वे दंतेवाड़ा में कलेक्टर रह चुके थे। पिछले चुनाव के समय वे जनसंपर्क विभाग में थे। इसके बाद से वे सीएम डॉ रमन सिंह के करीबी और पसंदीदा अफसरों के रूप में गिने जाते रहे हैं। ओपी चौधरी अपने कामों की वजह से छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय हैं। दंतेवाड़ा की एजुकेशन सिटी हो या रायपुर में गरीब बच्चों को स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिला दिलवाने की बात हो उन्होंने इनका प्रतिनिधित्व किया। बेहतरीन काम के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है।