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MP विधानसभा चुनाव 2023 से पहले जयस की ताकत में हुआ इजाफा, जानें क्या और कैसे हुआ

- विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी संगठन जयस को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आई है...

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भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2023 से पहले जहां प्रदेश की हर पार्टी इन दिनों खुद को मजबूत करने में लगी है। वहीं इसी बीच आदिवासी संगठन जयस को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। यहां ये भी जान लें कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन दिनों सभी दलों की नजरें आदिवासियों पर टिकी हुईं है। इसका कारण यह है कि पूरे देश में सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी मप्र में है।

तो चलिए ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि आखिर किस मामले को लेकर आदिवासी संगठन जयस इन दिनों चर्चा में बनी हुई है और जयस को लेकर वह कौन सी बड़ी खबर आई है, जो किसी तरह अन्य पार्टियों को प्रभावित कर सकती है।

दरअसल मध्य प्रदेश में आदिवासी संगठन जयस के दो गुट अब एकजुट हो गए। सामने आ रही जानकारी के अनुसार जयस आदिवासी संगठन के गुटों में एक समझौता हुआ। यह समझौता खलघाट में जयस के सभी सदस्यों की बैठक के दौरान हुआ। इस बैठक में हीरालाल अलावा, विक्रम अछालिया, महेंद्र कन्नौज ने हाथ मिलाया है। ज्ञात हो कि हीरालाल अलावा, विक्रम अछालिया और महेंद्र कन्नौज जयस के संस्थापक सदस्य हैं, ऐसे में धार के खलघाट में जयस के नेताओं ने एकजुटता का संदेश दिया।

MP में 50 आदिवासी बाहुल्य सीट- जहां है जयस का खास असर
ज्ञात हो कि मप्र की 50 आदिवासी बाहुल्य सीटों पर जयस का खास असर है। वहीं जयस का ये मानना है कि आदिवासियों के मामले में गैर आदिवासी फैसला नहीं लेंगे। इसके अलावा जयस की ओर से विधानसभा 2023 में चुनाव लडने का ऐलान भी कर दिया गया है।

ये हो सकता है असर
राजनीति के जानकारों के अनुसार जयस मालवा निमाड़ में तकरीबन 18 आदिवासी आरक्षित सीटों पर अत्यधिक एक्टिव हैं। यही वजह है कि भाजपा का यहां से 2018 में खेल बिगड़ गया था। ज्ञात हो कि मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अच्छी खासी आदिवासियों की आबादी है और चूकिं जयस मुख्य रूप से आदिवासियों का संगठन है और साल 2018 के मुकाबले साल 2023 में जयस पहले से ज्यादा मजबूत हुई है।

इसी सब के चलते अभी कुछ समय पहले ही हुए पंचायत चुनाव में जयस के कई प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की थी, ऐसे में संभावना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव 2023 में जयस खासकर मालवा-निमाड़ में गेमचेंजर की भूमिका में रह सकती है। ज्ञात हो कि मप्र की गददी के मामले में मालवा निमाड़ काफी खास माना जाता है ऐसे में जयस पर राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों का खेल बिगाडने की क्षमता दिख रही है।