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झारखंड: आत्‍मसमर्पण करने वाले माओवादी ओपन जेल में रहेंगे

कैबिनेट के फैसले के बाद नई नीति के तहत आत्‍मसमर्पण करने वाले माओवादियों को ओपन जेल में रखने का काम शुरू कर दिया गया है।

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झारखंड: आत्‍मसमर्पण करने वाले माओवादी जेल के बजाय ओपन जेल में रहेंगे

नई दिल्‍ली। झारखंड सरकार ने उग्रवादियों और माओवादियों पर लगाम लगाने के लिए एक नई नीति पर अमल करने का फैसला लिया है। इस नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। झारखंड पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक रघुवर दास सरकार की इस नई नीति काफी असरकारी है। सरकार की इस नीति के लाभ उठाकर माओवादी मुख्‍यधारा से जुड़कर बेहतर जीवन जी सकते हैं।

मुख्‍यधारा से जोड़ने में मिलेगी मदद
इसे झारखंड सरकार ने नई रिवॉर्ड पॉलिसी नाम दिया है। इस नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस पर कवायद तेज हो गई है। झारखंड पुलिस के मुताबिक नई सरेंडर पॉलिसी लागू होने के बाद माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। पुरानी नीति के तहत 175 माओवादियों ने आत्‍मसमर्पण किया था। पुलिस का कहना है कि जिन माओवादियों से समर्पण कर दिया है उन्‍हें वादों के अनुरूप सभी सुविधाएं दिलाने का काम पुलिस प्रशासन करेगी।

चरणबद्ध तरीके से शिफ्ट किया जाएगा
सरकार की इस नीति के तहत आत्‍मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सामान्य जेल के बजाय ओपन जेल में रखा जाएगा। आपको बता दें कि अभी तक आत्‍मसमर्पण करने वाले 62 माओवादियों को सामान्य जेलों में रखा गया है। बैठक के दौरान यह तय किया गया है कि चरणबद्ध तरीके से माओवादियों को ओपन जेल में शिफ्ट किया जाएगा। अभी दो माओवादियों को ओपन जेल भेजने का फैसला हुआ है। सरेंडर कर चुके 88 माओवादी जमानत पर छूट चुके हैं, आठ की मौत हो चुकी है। आत्‍मसमर्पण करने वाले माओवादियों को हजारीबाग स्थित बिरसा मुंडा ओपन जेल में परिवार के साथ रहने की सुविधा मिलेगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि सरकार का इस नीति के पीछे मूल मकसद किन्‍हीं कारणों से भटक गए लोगों को माओवादी गतिविधियों से बाहर निकाल उन्‍हें मुख्‍यधारा से जोड़ने की है। ताकि घर वापसी करने के इच्‍छुक माओवादी मुख्‍यधारा से जुड़ सकें और समाज का हिस्‍सा बन सकें।

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