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राज्यपाल बनने के लिए जीतन राम मांझी ने तोड़ा नीतीश से गठबंधन! बेटे को बनाएंगे सांसद, NDA में वापसी तय

Bihar Politics: बिहार में इस वक्त चर्चा है कि राजनीति में कई बार पाला बदल चुके जीतन राम मांझी ने राज्यपाल बनने के लिए बिहार के महागठबंधन से अलग हो गए है।

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पटना

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Prashant Tiwari

Jun 16, 2023

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी मंगलवार को बिहार के महागठबंधन से अलग हो गए। अलग होने के साथ ही उनके बेटे शेखर कुमार सुमन ने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा भी दे दिया। बताया जा रहा है कि मांझी का ऐसे वक्त पर महागठबंधन छोड़ने के फैसले के पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ है। भाजपा मांझी के सहारे बिहार में दलित और महादलितों को साधने की तैयारी कर रही है।

तो क्या राज्यपाल बनने के लिए मांझी ने तोड़ा गठबंधन?
बिहार की राजनीति में कई बार पाला बदल चुके मांझी सियासी हवा का रुख बखूबी जानते है। उन्होंने अपने फायदे के लिए महागठबंधन का साथ छोड़ा है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा और हम के बीच बड़ी डील हुई है। भाजपा ने पिता जीतन राम मांझी को राज्यपाल तो बेटे डॉ. संतोष सुमन को लोकसभा टिकट ऑफर दिया। इस डील को लेकर बिहार की राजनीति में खूब चर्चा चल रही है।

NDA में वापसी तय
राजनीति के पक्के खिलाड़ी मांझी जानते है कि उनके दोनों हाथ में लड्डू है। अगर वह महागठबंधन में रहते है तो उनके बेटे मंत्री रहने के साथ ही बिहार सरकार में दखल रहेगा। लेकिन अगर वह NDA में वापसी करते है तो भाजपा उन्हें राज्यपाल बनाने के साथ ही उनके बेटे को पहले सांसद फिर केंद्र में मंत्री बना सकती है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में 13 अप्रैल को हुए मांझी के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद ही उनकी NDA में वापसी तय हो गई थी। 13 जून को उनके बेटे के इस्तीफे के बाद यह स्थिति पानी की तरह साफ हो गई।

नीतीश पर आरोप लगा छोड़ा महागठबंधन
2022 में नीतीश के भाजपा से गठबंधन छोड़ने के बाद मांझी की हम JDU के साथ चली गई थी। लेकिन एक साल पूरा होने से पहले ही उन्होंने CM नीतीश पर उनकी पार्टी हम का JDU में विलय को लेकर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए महागठबंधन तोड़ दिया। उनके बेटे ने मंगलवार को कहा था कि मुख्यमंत्री हम पर बार-बार दबाव बना रहे थे कि आप अपनी पार्टी का उनकी पार्टी में विलय कर ले। लेकिन हमने छोटी पार्टी होने के बावजूद उनकी पार्टी में विलय नहीं करने का फैसला किया और गठबंधन छोड़ दिया।

मुकेश सहनी के भी NDA में शामिल होने की चर्चा
भाजपा की प्लानिंग लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में दलित और महादलितों के वोट को साधने की है। केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोजपा और सांसद चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) पहले से भाजपा के साथ हैं।
अब बड़ी डील करके जीतन राम मांझी और उनकी पार्टी को भाजपा अपने पाले में ले आई है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि जल्द ही VIP पार्टी और उसके नेता मुकेश सहनी को फिर से NDA का हिस्सा बना लिया जाएगा। केंद्र सरकार ने मुकेश सहनी को इसी साल फरवरी महीने में 'Y प्लस' की सुरक्षा दी थी। भाजपा को विश्वास है कि इन नेताओं के जरिए वो बिहार में दलित और महादलितों के वोट को NDA के पक्ष में ला पाएगी।

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अच्छा हुआ जो गठबंधन तोड़ लिया-नीतीश कुमार
जीतन राम मांझी की पार्टी से गठबंधन टूटने के तीन दिन बाद नीतीश कुमार की भी प्रतिक्रिया आई है। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अच्छा हुआ जो खुद ही बाहर चले गए। वह और उनके नेता दिल्ली जाकर भाजपा नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। इस पर हमने उनसे कहा कि आप अपनी पार्टी का हमारे पार्टी में विलय कर ले लेकिन उन्हें उनका पाला ज्यादा अच्छा लगा और गठबंधन तोड़ लिया।