कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का ऐतिहासिक घटनाक्रम

Amit Kumar Bajpai

Publish: May, 17 2018 06:42:03 AM (IST)

Political
कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का ऐतिहासिक घटनाक्रम

कर्नाटक चुनाव में एक और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला और पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने किसी राजनीतिक मामले के लिए देर रात सुनवाई की।

नई दिल्ली। कर्नाटक चुनाव परिणाम आने के बाद से नाटकीय घटनाक्रम जारी है। सरकार गठन को लेकर कांग्रेस-जेडीएस के गठजोड़ और भारतीय जनता पार्टी के दावों के बीच बुधवार को जहां राज्यपाल वजुभाई वाला ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया, कांग्रेस इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। इसके बाद एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को सुनवाई शुरू की, लेकिन यह एक ऐतिहासिक घटना थी क्योंकि पहली बार किसी राजनीतिक मामले की सुनवाई के लिए आधी रात को सर्वोच्च न्यायालय ने सुुनवाई की।

हालांकि कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट जाना बेकार साबित हुआ और आधी रात से तड़के चार बजे तक चली ऐतिहासिक सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और जेडीएस द्वारा दायर की गई याचिका पर आगे सुनवाई जारी करने के लिए भी कहा है। कोर्ट ने इस संबंध में दोनों दलों से जवाब मांगा है।

वहीं, बृहस्पतिवार की आधी रात को चली तकरीबन ढाई घंटे की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना। इससे पहले राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा को राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का न्योता देने के खिलाफ कांग्रेस ने आधी रात सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कांग्रेस की ओर से पूर्व में हुए फैसलों का ब्यौरा देते हुए कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप के लिए कहा गया।

इसके चलते देर रात सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार याचिका लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के आवास पहुंचे। मिश्रा ने तकरीबन एक घंटे बाद देर रात ही इस मामले में सुनवाई का फैसला लिया और उन्होंने जस्टिस एके सीकरी के नेतृत्व में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए बोबडे की बेंच गठित की। इस बेंच ने बृहस्पतिवार की रात 1:45 बजे याचिका पर सुनवाई शुरू की।

 

प्रमुख घटनाक्रम

  • 16 मई
    रात 9:30 बजे: कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया।
    रात 10:55 बजे: राज्यपाल के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।
    रात 11:35 बजेः कांग्रेस और जेडीएस की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो गई।
    रात 12:00 बजेः सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार सीजेआई के आवास पर पहुंचे।
    17 मई
    रात 1:05 बजेः सीजेआई ने सुनवाई करने पर हामी भरी और बेंच गठित की।
    रात 1:10 बजेः कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी, एएसजी तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
    रात 2:00 बजेः जस्टिस एके सीकरी की अगुवाई में तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
    तड़के 4:30 बजेः तीन जजों की बेंच ने शपथ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

  • कांग्रेस
    अभिषेक मनु सिंघवीः बहुमत साबित करने को 15 दिनों का वक्त क्यों दिया? उनके पास तो केवल 104 विधायक हैं।
    जस्टिस बोबडेः आपको (कांग्रेस) कैसे पता, येदियुरप्पा ने बहुमत के लिए विधायकों की सूची नहीं सौंपी है।
    अभिषेक मनु सिंघवीः दलबदल कानून लागू हो सकता है। शपथ रोकनी चाहिए।
    जस्टिस सीकरीः राज्यपाल की चिट्ठी कहा है? जब चिट्ठी नहीं तो दलील कैसे सुनें। राज्यपाल के फैसले पर दखल देने की परंपरा नहीं है।
    अभिषेक मनु सिंघवीः राज्यपाल भाजपा के दबाव में काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति शासन पर कोर्ट रोक लगा सकता है तो राज्यपाल के फैसले पर क्यों नहीं।
  • भाजपा
    जस्टिस वेणुगोपालः मध्यरात्रि सुनवाई नहीं। शपथ से आसमान नहीं टूटेगा।
    जस्टिस बोबडेः 15 दिन समय क्यों?
    जस्टिस सीकरीः विपक्ष 117 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है तो आप (भाजपा) 112 विधायकों का समर्थन कैसे जुटाएंगे? आंकड़े आपके साथ नहीं हैं।
    वेणुगोपालः नहीं पता। राज्यपाल विवेक से फैसले ले सकते हैं।
    जस्टिस बोबडेः हम, राज्यपाल के विवेक पर सवाल नहीं उठा रहे, लेकिन उसके फैसले की समीक्षा कर रहे हैं।
    रोहतगीः कोर्ट बहुमत साबित करने की अवधि 15 दिन को करके 10 या सात दिन कर सकता है।

आखिर रात में ही सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची कांग्रेस
दरअसल बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे बीएस येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण होना है। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को लगा कि अगर बृहस्पतिवार को अर्जी दी गई तो फायदा नहीं होगा, क्योंकि तब तक शपथ हो चुकी होगी। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी पहुंचे तो केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, एएसजी तुषार मेहता, मनिंदर सिंह। पूर्व एजी मुकुल रोहतगी भाजपा विधायकों की ओर से मामले की पैरवी के लिए पहुंचे।

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