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सियासत का अतीतः जानिए, कब-कब सरकार नहीं बना पाई सबसे बड़ी पार्टी?

कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता मिला तो कई सवाल खड़े हो गए। इससे पहले कई बार सबसे बड़े दल सरकार बनाने से वंचित रह गए।

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Siyasat

नई दिल्ली। कर्नाटक को जीतने के लिए सभी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया लेकिन वहां भी कांग्रेस को निराशा ही हाथ लगी। दरअसल, कर्नाटक में राज्यपाल वजुभाई वाला ने सबसे बड़े दल बीजेपी (104 सीट) को सरकार बनाने का न्योता दिया गया है। वहीं कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन (116 सीटों का दावा) को न्योता नहीं मिलने से सवाल खड़े हो गए थे। कांग्रेस-जेडीएस को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों पार्टियों की मांग पर बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जबसे राजभवन की ओर से सरकार बनाने का न्योता दिया गया, तभी से इस बात पर बहस तेज हो गई कि संविधान क्या कहता है? इससे पहले कई मौके ऐसे भी आए जब सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया गया। हालांकि कई बार बड़े दलों ने बहुमत का दावा राज्यपाल के समक्ष पेश ही नहीं किया।

गोवा विधानसभा चुनाव 2017
गोवा में 40 विधानसभा क्षेत्र हैं। चुनाव में कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 21 के आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई। ऐसे में राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दिया। आपको बता दें कि यहां बीजेपी 13 विधायकों के साथ दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी, लेकिन उसने गोवा फॉरवर्ड पार्टी (तीन विधायक), महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी (तीन विधायक), एनसीपी (एक विधायक) और दो निर्दलीयों का समर्थन लेकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017
इसी तरह मणिपुर में 60 विधानसभा सीटों पर 2017 में चुनाव हुए थे। इन चुनावों में कांग्रेस 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से तीन कदम दूर रह गई। ऐसे में उसे सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला। यहां कांग्रेस ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने बीजेपी के दावे पर ज्यादा सहमति जताई। बीजेपी (21 सीट) ने यहां एनपीएफ समेत अन्य छोटे दलों और निर्दलीय के समर्थन से 32 सीटों का दावा किया, जो सरकार गठन के लिए पर्याप्त था।

मेघालय विधानसभा चुनाव 2018
मेघालय विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। 60 सीटों की विधानसभा में 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के लिए जरूरी 30 सीटों के आंकड़े से दूर रह गई। यहां 19 सीटों के साथ एनपीपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन उसने बीजेपी (2), यूडीपी (6), एचएसपीडीपी (2), पीडीएफ (4) और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंप दिया। इस तरह यहां भी सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं मिला।

बिहार में नीतीश सरकार
बिहार में जेडीयू और आरजेडी ने मिलकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। लेकिन चुनाव से पहले बना यह गठबंधन बाद में टूट गया। 243 विधानसभा सीटों वाली इस विधानसभा में आरजेडी 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन जब गठबंधन टूटा और सरकार अस्थिर हुई तो आरजेडी को सरकार बनाने का मौका नहीं मिल पाया क्योंकि जेडीयू और बीजेपी ने मिलकर नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बना दिया।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013
दिल्ली में इस चुनाव में त्रिशंकु की स्थिति बन गई। यहां बीजेपी 31 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन 70 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 36 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाई। ऐसे में उसने सरकार बनाने का दावा ही नहीं किया। यहां कई दिनों तक असमंजस की स्थिति चली। अंत में कांग्रेस के सात और एक अन्य विधायक के समर्थन से केजरीवाल ने सरकार बनाई थी। इसके अलावा भी ऐसे कई मामले पहले सामने आ चुके हैं।

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