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क्या आप हिमाचल के नए सीएम जयराम ठाकुर के राजनीतिक करियर को जानते हैं ?

मंडी की सिराज सीट से पांचवी बार विधायक चुने गए हैं जयराम ठाकुर, पहली बार बने हैं राज्य के मुख्यमंत्री

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Jai Ram Thakur

Jai Ram Thakur

शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। रविवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में बीजेपी के वरिष्ठ नेता जयराम ठाकुर को हिमाचल प्रदेश का नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया गया है। मंडी की सिराज सीट से चुनाव जीते जयराम ठाकुर का नाम कई दिनों से सीएम की रेस में था और प्रेम कुमार धूमल ने भी उनके नाम पर मुहर लगा दी थी। हालांकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का नाम भी सीएम पद की रेस में शामिल था।

मंडी से पहले मुख्यमंत्री होंगे ठाकुर

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से जयराम ठाकुर पहले मुख्यमंत्री होंगे। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाईएस परमार सिरमौर से थे। ठाकुर रामलाल व वीरभद्र सिंह शिमला से थे। भाजपा के मुख्यमंत्री शांता कुमार कांगड़ा व प्रेम कुमार धूमल हमीरपुर से थे। पिछले 18 दिसंबर को धोषित किए गए विधानसभा चुनाव परिणामों में कुल 68 सदस्यों के सदन में भाजपा को 44 सीटें मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में अंदरूनी होड चल रही थी। जयराम ठाकुर व जेपी नड्डा इस दौड़ में आगे थे। चुनाव में हार गए मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल के समर्थक लगभग आधे विधायक धूमल को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे। जय राम ठाकुर 2007 में बीजेपी की प्रेम कुमार धूमल सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे। ठाकुर पहली बार विधानसभा 1998 में पहुंचे थे। जयराम ठाकुर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काम किया है।

मंडी के सिराज सीट से पांचवीं बार हैं विधायक

जयराम ठाकुर आगामी 6 जनवरी को 53 साल पूरे करने जा रहे है। वे हिमाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण मौजूदगी वाले राजपूत समुदाय से हैं। मंडी जिले की सिराज सीट से जयराम ठाकुर लगातार पांचवी बार विधायक चुने गए है। ठाकुर वर्ष 2007 से 2012 तक रही प्रेम कुमार धूमल सरकार में मंत्री थे। मंडी के कॉलेज से गेजुएशन करने के बाद ठाकुर ने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। मंडी जिले के टांडी गांव में अपने पैतृक निवास पर जयराम ठाकुर की अस्सी वर्षीय मां बीरी सिंह ने कहा कि मेरे पुत्र ने बचपन में काफी गरीबी देखी है।

जयराम का राजनीतिक करियर
पांचवीं बार चुनकर विधानसभा पहुंचे जयराम ठाकुर की संगठन में भी उतनी ही अच्छी पकड़ है, जितनी पार्टी में। 1965 में जन्में जयराम का जीवन संघर्ष और चुनौती भरा रहा। घरेलू परिस्थितियां पक्ष में न होने के बावजूद उन्होंने बमुश्किल हाई स्कूल किया और कॉलेज में दाखिला लिया। 1998 में वह पहली बार चेच्योट विधानसभा
क्षेत्र से विधायक चुने गए, जो सिलसिला 2017 तक भी उन्होंने बरकरार रखा।

कैसे परवान चढ़ा राजनीतिक सफर:-
- 1984 में एबीवीपी से छात्र राजनीति में आए और कला संकाय में पढ़कर कक्षा प्रतिनिधि का पद जीता।
- 1986 में एबीवीपी की प्रदेश इकाई में संयुक्त सचिव बने।
- 1989 से 1993 तक एबीवीपी की जम्मू-कश्मीर इकाई में संगठन सचिव रहे। यहां से संगठन में इन्हें काफी अच्छी पकड़ मिली।
- 1993 से 1995 तक भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव और प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
- 1998 में जयराम पहली बार विधायक बने।
- 2000 से 2003 तक वह मंडी जिला भाजपा अध्यक्ष रहे। 2003 में फिर चुनाव जीते।
- 2003 से 2005 तक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे।
- 2006 में उन्हें प्रदेशाध्यक्ष का पद मिला।
- 2007 में चुनाव जीतकर पंचायतीराज मंत्री बने।
- 2012 में वह फिर सिराज से जीते।

1993 में घरवालों ने किया था विरोध
ग्राम पंचायत मूराहग के तांदी गांव में 6 जनवरी, 1965 को जेठूराम और ब्रिकमू देवी के घर जन्मे जयराम ठाकुर का बचपन गरीबी में कटा। परिवार में 3 भाई और 2 बहनें हैं। पिता खेतीबाड़ी और मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते थे। जयराम तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। इसलिए उनकी पढ़ाई-लिखाई में परिवार वालों ने
कोई कसर नहीं छोड़ी। जयराम की मां बिक्रमू देवी कहती हैं कि उन्हें आज भी याद है कि जयराम के राजनीति में जाने को लेकर कोई खुश नहीं था। घर परिवार से दूर जम्मू-कश्मीर जाकर एबीवीपी का प्रचार किया। जब 1992 में घर लौटे, तो वर्ष 1993 में जयराम ठाकुर को भाजपा ने सिराज विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर चुनाव मैदान
में उतार दिया। घरवालों को इसका पता चला, तो उन्होंने विरोध किया। जयराम ठाकुर के बड़े भाई बीरी सिंह बताते हैं कि परिवार के सदस्यों ने जयराम ठाकुर को राजनीति में न जाकर खेतीबाड़ी संभालने की सलाह दी थी। चुनाव लड़ने के लिए परिवार की आर्थिक स्थिति इजाजत नहीं दे रही थी। जयराम ने अपने दम पर राजनीति
में डटे रहने का निर्णय लिया और विधानसभा चुनाव लड़ा। उस वक्त जयराम ठाकुर मात्र 26 वर्ष के थे। वे यह चुनाव हार गए। वर्ष 1998 में भाजपा ने फिर जयराम को चुनावी रण में उतारा। इस बार इन्होंने जीत हासिल की। उसके बाद विधानसभा चुनाव में कभी हार का मुंह नहीं देखा।

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