
ऐसे नेता जिनके लिए चुनाव लड़ना खेल, हारने के लिए उतरते हैं मैदान में
नई दिल्ली।लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। चौथे चरण का मतदान बीते सोमवार को संपन्न हुआ है। तीन अन्य चरणों के लिए वोटिंग होनी बाकी है। ऐसे में सियासी पार्टियां और नेता जनता को लुभाने के लिए चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंके हुए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा वोटों के अन्तर से जीत सकें। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे नेता भी हैं जो हर साल चुनाव तो लड़ते हैं, लेकिन जीतने के लिए नहीं बल्कि हारने के लिए। हार भी ऐसी कि चुनावी नतीजों में फेल होने के बाद कोई मिठाई बंटता है तो कोई लोगों का धन्यवाद ये कह कर करता है कि मेरे समर्थन में वोट ना डालकर बहुत अच्छा काम किया। आइए जानते हैं ऐसे 5 अनोखें लोगों के बारे में जिनके लिए चुनाव लड़ना महज एक खेल है-
1.फक्कड़ बाबा-16 बार हार चुके हैं चुनाव
लंबी सफेद दाढ़ी, चेहरे पर बुढ़ापे की झुर्रियां और हाथ में सहारे के लिए पकड़ी छड़ी, हम बात कर रहे हैं यूपी के रहने वाले फक्कड़ बाबा की। 1976 से लगातार लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे फक्कड़ बाबा इस बार भी चुनावी मैदान में उतरे हैं। वह मथुरा से बीजेपी प्रत्याशी हेमा मालनी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। आपको बता दें कि यह उनका कोई पहला चुनाव नहीं है। अब तक वह 16 बार चुनाव हार चुके हैं। लेकिन तब भी चुनाव लड़ने का उनका जोश कम नहीं हुआ और ना ही उन्हें हार का मलाल है। दरअसल, इसके पीछे की वजह उनके गुरु की कही बात है। फक्कड़ बाबा के मुताबिक, उनके गुरु ने उनसे कहा था कि जब वे 20वीं बार चुनाव लड़ेंगे तभी उन्हें जीत मिलेगी। इस बार उनका 17वां चुनाव है। मतलब इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने के पीछे भी उनका मकसद जीत नहीं बल्कि हार की गिनती पूरी करनी है।
2. जोगिंदर सिंह 'धरतीपकड़'- लगभग 300 हार चुके हैं चुनाव
जोगिंदर सिंह धरतीपकड़, ऐसा नाम जिसने करीब 300 बार चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार जीत नहीं बल्कि हार का स्वाद चखाने के लिए। 1918 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरावालां में जन्मे जोगिंदर सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं। 1998 में उनकी मौत हो चुकी है। लेकिन चुनाव के दौरान उनकी बात जरूर होती है। आजादी के बाद वह उत्तर प्रदेश के बरेली के कानून गोयान (शामतगंज) में बस गए थे। लेकिन अपने जीवन के 36 साल में उन्होंने 300 से भी अधिक बार चुनावी मैदान में ताल ठोंकी। ऐसा नहीं है कि उन्होंने सिर्फ लोकसभा और विधानसभा चुनाव ही लड़ा। धरतीपकड़ ने तो राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति पद तक के चुनाव में भी अपनी दावेदारी ठोंकी और हर बार हारे। उन्होंने कभी भी इसका गम नहीं मनाया बल्कि जिनती बार भी वह हारे उनती बार वह सूखे मेवे और मिश्री लोगों में बांट कर जश्न मनाते थे।
3. नरेंद्र नाथ दुबे 'अडिग'-बनाते हैं हार का रिकॉर्ड
'अडिग' के नाम से जाने जाने वाले यूपी के काशी के रहने वाले नरेंद्र नाथ दुबे हर बार चुनावी मैदान में उतरते हैं। वह 1984 से लेकर अब तक चुनाव लड़ते आ रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें अडिग कहा जाता है। लेकिन आपको बता दें कि अडिग जीतने के लिए चुनाव नहीं लड़ते। उनकी बस इतनी ख्वाहिश है कि उनका नाम सबसे ज्यादा चुनाव लड़ने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो।
4. डॉ. के पद्मराजन-वोट ना करने की करते हैं अपील
आपने कभी ऐसा सुना या देखा है कि कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन लोगों से अपने लिए वोट ना करने की अपील करे। शायद नहीं। लेकिन तमिलनाडु के सालेम के रहने वाले डॉ. के पद्मराजन ऐसे प्रत्याशी हैं जो चुनाव लड़ते तो जरूर हैं लेकिन लोगों से वोट ना करने की अपील के साथ। बता दें कि 2018 तक वह 181 बार चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन कभी भी जीत हासिल नहीं की। उन्हें लोग चुनाव राजा बुलाते हैं। पद्मराजन जब भी चुनाव में उतरते हैं तो भगवान से जीतने की नहीं, बल्कि हारने की दुआ करते हैं। अब तक वह 20 लाख रुपए से भी अधिक धन नामांकन पर खर्च कर चुके हैं। 60 साल के पद्मराजन चुनाव प्रचार में पैसे खर्च नहीं करते। दरअसल, इसके पीछे की वजह अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराना हैं। बता दें कि पहले ही उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में 2004, 2014 और 2015 में सबसे अधिक चुनाव हारने वाले उम्मीदवार के रूप में दर्ज है।
5. रंगास्वामी- 86 बार लड़ चुके हैं चुनाव
कर्नाटक में जन्मे रंगास्वामी 86 बार चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने कर्नाटक की राजनीति में 1967 से लेकर 2004 तक अहम भूमिका निभाई है। बता दें कि वह एक से बढ़कर एक बाहुबली नेताओं के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। लेकिन वह जितनी बार चुनाव लड़े उतनी बार हारे हैं। चुनाव हारने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है।
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Updated on:
30 Apr 2019 10:43 pm
Published on:
30 Apr 2019 07:05 am
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