
Misa Act in Emergency
नई दिल्ली। आपातकाल को आज 43 साल पूरे हो गए हैं। 1975 में आज ही के दिन 25 और 26 जून की आधी रात को इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी। आपातकाल में पूरी दुनिया ने लोकतंत्र की हत्या देखी थी। पूरे देश में मीसा कानून के तहत लोगों को जेलों में भरा जाने लगा। इतना ही नहीं लोगों की आजादी के साथ-साथ प्रेस की आजादी भी छीन ली गई। राजनीतिक विरोधियों को उनके घरों, ठिकानों से उठाकर जेलों में डाल दिया गया था। अभिव्यक्ति की आजादी पर सेंसरशिप का ताला जड़ दिया गया था। प्रेस पर पूरी तरह से सरकार ने अपना शिकंज कस लिया था। जो भी प्रसारित किया जाना होता था तो वो सरकार से पहले पास होता था। प्रकाशन-प्रसारण से पहले सामग्री को सरकारी अधिकारी के पास भेज कर उसे सेंसर करवाना पड़ता था।
आपातकाल में मीसा के तहत हुईं थीं 1 लाख गिरफ्तारियां
आपातकाल में सबसे ज्यादा चर्चा जिसकी रही वो था मीसा (आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) Maintenance of Internal Security Act, उस समय की पत्र-पत्रिकाओं, किताबों से ये पता चलता है कि मीसा कानून के तहत इंदिरा सरकार पूरी तरह से तानाशाह हो गई थी। आपातकाल को कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी भूल माना जाता है, जिसका दंश पार्टी आजतक झेल रही है। मीसा कानून के तहत आम लोगों के साथ-साथ मौजूदा समय में कई बड़े नेताओं को उठाकर जेल में डाल दिया गया था। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर लाल कृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली से लेकर रविशंकर प्रसाद तक का नाम शामिल है। जानकारी के मुताबिक, मीसा कानून के तहत करीब 1 लाख लोगों को जेल के अंदर डाल दिया गया था।
कई बड़े-बड़े नेताओं को मीसा के तहत डाला गया था जेल में
मीसा कानून साल 1971 में लागू किया गया था, लेकिन इसका पूर्णत: इस्तेमाल आपातकाल के दौरान किया गया था। इस दौरान कांग्रेस ने विरोधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डालने के लिए किया गया। मीसा यानी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम में आपातकाल के दौरान कई संशोधन किए गए और इंदिरा गांधी की निरंकुश सरकार ने इसके जरिए अपने राजनीतिक विरोधियों को कुचलने का काम किया। मीसा और डीआरआई के तहत एक लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। आपातकाल के वक्त जेलों में मीसा बंदियों की बाढ़ सी आ गई थी। नागरिक अधिकार पहले ही खत्म किए जा चुके थे और फिर इस कानून के जरिए सुरक्षा के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किया गया, उनकी संपत्ति छीनी गई। जब तक आपातकाल लागू रहा तब तक मीसाबंदी जेल में ही कैद रहे थे।
लालू की बेटी का नाम भी पड़ा मीसा कानून पर
आपातकाल में मीसा के तहत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भी जेल में डाल दिया गया था। आपातकाल के दौरान साल 1976 में लालू यादव की बड़ी बेटी का जन्म हुआ था। लालू यादव ने अपनी बेटी का ही नाम मीसा भारती रखा था। बताया जाता है कि इसी कानून की वजह से ही लालू यादव ने अपनी बेटी का नाम मीसा भारती रखा था। हालांकि कहा ये भी जाता है कि जब मीसा भारती का जन्म हुआ था तो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने लालू की बेटी का नाम मीसा भारती रखा था।
Published on:
26 Jun 2018 02:43 pm
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