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आरजीपीवी और एम्स मिलकर करेंगे बायोटेक्नोलोजी, नेनोटेक्नोलोजी आदि संबंधी रिसर्च, छात्रों के साथ मरीजों को मिलेगा लाभ

आरजीपीवी और एम्स भोपाल के बीच हुआ एमओयू, अकादमिक गतिविधियों में भी बढाएंगे सहयोग

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भोपाल

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Sunil Mishra

Apr 25, 2022

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आरजीपीवी और एम्स के बीच हुआ एमओयू

भोपाल . राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल के बीच सोमवार को अकादमिक और अनुसन्धान में परस्पर सहयोग किए जाने के लिए एमओयू किया गया । एमओयू के अनुसार दोनों संस्थान पारस्परिक हित के क्षेत्रों में अकादमिक गतिविधि और अनुसंधान सहयोग करने के लिए बौद्धिक और बुनियादी ढांचा में सहयोग करेंगे, साथ ही बायोमेडिकल रिसर्च, जैव प्रौद्योगिकी, नैनोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, औषधि विज्ञान, कंप्यूटर इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शोध करेंगे।

आरजीपीवी एवं एम्स आगामी समय में बायोमेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में काम करने वाले अपनी संस्था के प्राध्यापकों को शोध के लिए सुविधाएं प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर संयुक्त शोध कार्य करेंगे। एमओयू के तहत एम्स और आरजीपीवी के प्रारंभिक और मध्य कैरियर संकाय सदस्यों के लिए अनुसंधान अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

विश्वविद्यालय मे संपन्न हुए एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान आरजीपीवी के कुलपति प्रो. सुनील कुमार, डॉ राजेश मलिक, डीन अकादमिक (एम्स) प्रो. अर्चना तिवारी, निदेशक, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, डॉ देबासिस विश्वास, डीन रिसर्च, डॉ जगत आर कंवर, विभाग प्रमुख जैव रसायन और डॉ रश्मी चौधरी और डॉ अशोक कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री विभाग, एम्स मौजूद थे ।

यह होगा लाभ
आरजीपीवी और एम्स के बीच एमओयू का लाभ इंजीनियरिंग और एम्स के छात्रों के साथ मरीजों को भी मिलेगा। क्योंकि इसके माध्यम से छात्रों केा आधुनिक क्षेत्रों के दोनों संस्थानों की फेकल्टी के साथ लैब का भी लाभ मिल सकेगा। इसके साथ जो शोधकार्य होंगे उसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। बायोटेक्नोलोजी और नैनोटेक्नोलोजी का आज इलाज में भी काफी उपयोग किया जा रहा है। इन्हीं के माध्यम से इलाज की नई तकनीकें विकसित हो रही हैं।