
INTERVIEW मुरली मनोहर जोशीः सॉफ्ट हिंदुत्व वाले नहीं समन्वयवादी नेता थे 'अटल'
मुकेश केजरीवाल
नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर जहां पूरे देश में शोक की लहर है, वहीं इस महान नेता से सबसे करीबी लोगों में शुमार भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी भी आहत हैं। जोशी का उस महान व्यक्ति के साथ 60 साल का संबंध रहा। मुरली मनोहर जोशी ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी कुछ खास यादें पत्रिका के साथ शेयर कीं। जोशी से बातचीत के प्रमुख अंश...
आज आम लोग उन्हें क्यों याद कर रहे हैं? क्योंकि उनके प्रति लोगों की श्रद्धा है। अटल जी राजनीति में केवल राजनीतिज्ञ नहीं थे जो सिर्फ प्रधानमंत्री बनने का सपना देखता हो। उन्होंने एक बार कहा था कि अगर सिद्धांत और नीति विहीन राजनीति हो तो ऐसी राजनीति में मैं एक मिनट भी नहीं रहूंना पसंद करूंगा। यह थे अटल जी। ना कि वह जो सभाओं में बढ़िया, हंसाने वाला, गुदगुदाने वाला कोई वाक्य बोलता हो। हां, वह भी उनके व्यक्तित्व का एक पहलू था।
अटलजी एक समन्वयवादी राजनीतिज्ञ थे। विरोधाभासों को हल करने वाले। डीएमके और विनय कटियार दोनों उनके साथ थे। किसानों की बात करने वाले सोमपाल शास्त्री और शरद यादव भी थे और वैश्विक अर्थनीतियों का आग्रह करने वाले अरुण जेटली और अरुण शौरी भी थे। छह वर्ष तक 22 से अधिक पार्टियों को ले कर सफलतापूर्वक सरकार चलाना और प्रधानमंत्री पर कहीं आक्षेप नहीं आना। यह उनकी खासियत थी।
राम मंदिर के प्रश्न पर भी उन्होंने समन्वय की हर तरह की कोशिश की। पांच दिसंबर को लखनऊ तक गए लेकिन फैजाबाद नहीं गए। हमसे कहा कि अध्यक्षजी अब आप जाइए। मैं तो प्रतिपक्ष का नेता हूं, मैं संसद में जाऊंगा।
क्या वाजपेयी का सोफ्ट हिंदुत्व में यकीन था ?
कुछ लोग उन्हें सोफ्ट हिंदुत्व वाला कहते हैं। लेकिन उन्होंने संघ से संबंध तोड़ने से इंकार कर दिया, भले ही जनता पार्टी से हटना पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि हम संघ से संबंध कैसे तोड़ दें, उससे तो हमारी नाल बंधी हुई है।
मौजूदा हिंसा पर क्या कहते?
यूं तो प्रकृति ने उनकी वाणि ही लंबे समय से बंद कर दी थी। लेकिन वे यह अवश्य बताते कि देश में समाज में हिंसा नहीं होना चाहिए। हिंसा से व्याप्त समाज उनको स्वीकार्य नहीं था
Updated on:
17 Aug 2018 07:06 pm
Published on:
17 Aug 2018 10:05 am
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