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राइट टू डिस्कनेक्टः अगर संसद में पास हो गया यह बिल, तो ऑफिस के बाद नहीं होगी कोई टेंशन

कर्मचारियों को काम के तनाव से मुक्ति दिलाना और कार्य-निजी जीवन में संतुलन बनाने के लिए लोकसभा में एक अनोखा बिल पेश किया गया है।

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नई दिल्ली। कर्मचारियों को काम के तनाव से मुक्ति दिलाना और कार्य-निजी जीवन में संतुलन बनाना कोई आसान काम नहीं है। हालांकि इसे आसान बनाने के लिए एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में एक अनोखा बिल पेश किया है। इसका नाम राइट टू डिस्कनेक्ट (Right to disconnect) है और यह कार्यालय का वक्त खत्म होने के बाद कर्मचारियों को अधिकारियों-नियोक्ताओं के फोन कॉल, टेक्स्ट और ई-मेल का जवाब ना देने का अधिकार देता है।

क्या है इस बिल की खासियत

कई देशों में लागू है ऐसा नियम

इस विधेयक के लागू होने में संशय बरकरार

यों तो पहली ही नजर में यह बिल कर्मचारियों को अपनी ओर पूरी तरह से आकर्षित करने वाला है, लेकिन इसके लागू होने में संशय बरकरार है। इसकी वजह यह है कि यह विधेयक एक प्राइवेट मेंबर बिल है। संसद में 1970 के बाद से अब तक कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल कानून का रूप नहीं ले सका है।