Maharashtra-Karnataka के बीच सीमा विवाद में आया नया मोड़, अब मुंबई को ये बनाने की उठी मांग

  • Maharashtra-Karnataka के बीच लगातार बढ़ रहा है सीमा विवाद
  • अब दोनों प्रदेशों के नेताओं के बीच शुरू हुई जुबानी जंग
  • मुंबई को लेकर भी उठने लगी खास मांग

By: धीरज शर्मा

Published: 28 Jan 2021, 11:48 AM IST

नई दिल्ली। सीमा को लेकर चल रहा महाराष्ट्र और कर्नाटक ( Maharashtra Karnataka ) के बीच का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस विवाद में राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग और मांगों का दौर शुरू हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ( CM Uddhav Thackeray ) के बयान के बाद अब कर्नाटक सीएम बीएस येदियुरप्पा का भी बड़ा बयान सामने आया है।

दरअसल सीएम उद्धव ठाकरे ने राज्य की सीमा से लगते कर्नाटक के मराठी भाषी बहुल इलाकों को सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने को कहा था। अब मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने भी मुंबई को लेकर अपनी मांग सामने रख दी।

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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी ने कहा है कि कर्नाटक के लोग चाहते हैं कि मुंबई को उनके राज्य में शामिल किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।

दरअसल, बुधवार को महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर एक किताब जारी की थी। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी चीफ शरद पवार, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहब थोराट और कुछ अन्य नेता मौजूद थे।

इसी कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि कोर्ट में मामला होने के बावजूद कर्नाटक सरकार ने जानबूझकर विवादित बेलगाम क्षेत्र का नाम बदल दिया।

यही नहीं महाराष्ट्र सीएम ने कहा कि, इस इलाके में रहने वाले मराठी भाषियों पर हो रहे अत्याचार को देखते हुए, हमारी सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगी कि जब तक मामला कोर्ट में है तब तक वह इस हिस्से को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।

उद्धव ठाकरे के इसी बयान पर पलटवार करते हुए बीएस येदियुरप्पा ने जवाब दिया है। उन्होंने मुंबई को ही यूनियन टेरेटरी घोषित किए जाने का मांग की है।

ये है पूरा मामला
आपको बता दें कि बेलगाम को लेकर कर्नाटक और महाराष्ट्र में विवाद चल रहा है। यह शहर कर्नाटक में है लेकिन महाराष्ट्र लंबे समय से इस पर अपना दावा ठोक रहा है।

महाराष्ट्र बेलगाम, करवार और निप्पनी सहित कर्नाटक के कई हिस्सों पर दावा करता है। उनका कहना है कि इन इलाकों में अधिकतर आबादी मराठी भाषी हैं। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद का यह मामला कई सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इसलिए हो रहा विवाद
देश आजाद होने से पहले पहले महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य नहीं थे। उस समय बॉम्बे प्रेसीडेंसी और मैसूर स्टेट हुआ करते थे। अभी के कर्नाटक के कई इलाके तब बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे।

आजादी के बाद राज्यों का बंटवारा शुरू हुआ और 1956 में राज्य पुनर्गठन कानून लागू हुआ तो बेलगाम को महाराष्ट्र की जगह मैसूर स्टेट का हिस्सा बना दिया गया और मैसूर स्टेट का नाम बदलकर 1973 में कर्नाटक हो गया।

बेलगाम में मराठी बोलने वालों की संख्या काफी होने की वजह से इसे महाराष्ट्र का हिस्सा बनाने की मांग राज्य पुनर्गठन के समय से ही हो रही है।

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1957 में ही महाराष्ट्र सरकार ने बेलगाम को कर्नाटक का हिस्सा बनाने का विरोध किया और एक आयोग बनाने की मांग की। इसके बाद उत्तर कन्नड़ जिले में आने वाले कारवाड सहित 264 गांव के साथ ही हलियल और सूपा इलाके के 300 गांव भी महाराष्ट्र को दिए जाने की मांग की।

इस रिपोर्ट में भी बेलगाम शहर को महाराष्ट्र में शामिल किए जाने की सिफारिश नहीं की गई। रिपोर्ट में महाराष्ट्र के शोलापुर समेत 247 गांवों के साथ केरल का कासरगोड जिला भी कर्नाटक को देने की सिफारिश की गई।

महाराष्ट्र और कर्नाटक, दोनों ने इन सिफारिशों को मानने से इनकार कर दिया। 2019 में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर तूल पकड़ चुका है।

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धीरज शर्मा
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