सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनके सहायकों की व्यवस्था को संगठित स्वरूप देने की तैयारी की गई है। इसके लिए पाठ्यक्रम, जरूरी योग्यता, जांच आदि सुनिश्चित व्यवस्था नई नीति के मसौदे में विस्तार से तय की गई है।