One Nation-One Election पर सर्वदलीय बैठक खत्म, PM मोदी ने दिया कमेटी बनाने का प्रस्ताव

One Nation-One Election पर सर्वदलीय बैठक खत्म, PM मोदी ने दिया कमेटी बनाने का प्रस्ताव

Dhiraj Kumar Sharma | Updated: 19 Jun 2019, 10:23:27 PM (IST) राजनीति

  • One Nation, One Election पर सर्वदलीय बैठक खत्म
  • सर्वदलीय बैठक में शिवसेना मौजूद नहीं
  • शरद पवार, सीताराम येचुरी, नवीन पटनायक समेत पहुंचे कई नेता

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi ) की अध्यक्षता में One Nation , One Election मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक खत्म हो गई। बैठक की जानकारी देते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अधिकांश दलों ने इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में वन नेशन, वन इलेक्शन पर एक कमेटी के गठन का प्रस्ताव दिया है। जो इससे जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगी। बैठक में कई दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि कांग्रेस सहित पांच पार्टियों ने इसे असली मुद्दों से ध्यान बंटाने की कोशिश बता कर बैठक का बहिष्कार किया। कांग्रेस पार्टी समेत तृणमूल कांग्रेस और बसपा, एसपी, टीडीपी समेत कई दलों ने बैठक से किनारा कर लिया।

 

समिति चर्चा कर देगी रिपोर्ट

बैठक में कई दलों के प्रमुख हिस्सा ने हिस्सा लिया । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बैठक के लिए 40 राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था। इसमें 21 दलों के नेता पहुंचे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ने इस काम के लिए एक समिति की घोषणा की है जो निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने सुझाव देगी। समिति सभी दलों के नेताओं से सुझाव लेगी। यह उन दलों के भी सुझाव लेगी, जिनके प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं हो सके हैं। बैठक के दौरान अधिकांश दलों ने इस पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है। हालांकि माकपा और भाकपा ने यह सवाल जरूर उठाया कि यह होगा कैसे। बैठक के दौरान एक देश एक चुनाव के अलावा भी कई मुद्दे उठाए गए।

वन नेशन-वन इलेक्शन के समर्थन में कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा पार्टी लाइन से अलग अपनी राय रखी। मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर चर्चा करने की जरूरत है। देवड़ा ने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि 1967 तक हमारे देश में एक साथ चुनाव होते थे।

क्या सोचते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश में लोकसभा के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव भी एकसाथ कराए जाएं जिससे धनबल के साथ-साथ जन-बल की भी बचत होगी।

 

rahul gandhi

अखिलेशः जनता से किए वादों पर काम करे सरकार

पीएम मोदी की ओर से one nation one election मुद्दे पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में ना जाने पर सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा बेहतर ये होगा कि बीजेपी ने जनता से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करने पर ध्यान दें। हमें उम्मीद है कि मोदी सरकार जनता की कसौटी पर ज्यादा खरी उतरेगी। जहां तक one nation one election का सवाल है तो इससे कई पार्टियां असहमत हैं।

इन दलों ने बनाई दूरी

- दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने इस बैठक में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया है। हालांकि ये निर्णय पार्टी ने बैठक से कुछ देर पहले ही लिया है। इससे पहले इस मुद्दे पर जब कांग्रेस से बात करने की कोशिश की गई,पार्टी की ओर से कोी जवाब नहीं मिला।

- एनडीए की सहयोगी पार्टी टीडीपी ( TDP ) ने भी एक राष्ट्र, एक चुनाव अवधारणा पर आधारित सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि अलग राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर चंद्र बाबू नायडू ने एनडीेए ने नाता तोड़ दिया था।

- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस भी सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी में हिस्सा लेने से मना कर दिया।

- मायावती ने भी इस बैठक से किनारा कर लिया है। यानी बहुजन समाज पार्टी की उपस्थिति भी इस बैठक में नहीं दिखी।

 

कई दलों ने किया समर्थन

राजग दलों के अलावा बीजद और वाईएसआर कांग्रेस ने भी इस विचार का खुल कर समर्थन किया है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि यह संघीय ढांचे की व्यवस्था को और मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राकांपा प्रमुख शरद पवार, जद यू प्रमुख नीतीश कुमार, नेशनल कांफ्रेस के फारुख अब्दुल्ला, अकाली दल के सुखबीर बादल, माकपा से सीताराम येचुरी, लोजपा से रामविलास पासवान, पीडीपी से महबूबा मुफ्ती, आम आदमी पार्टी के राघव चढ्ढ़ा, तेलंगाना राष्ट्र समिति से केटी रामा राव बैठक में शामिल हुए।

नहीं पहुंचे ये बड़े नेता

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, बसपा प्रमुख मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन भी बैठक में शामिल नहीं हुए। इसी तरह तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के चंद्रशेखर राव, आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल और तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू खुद तो नहीं आए, लेकिन अपने प्रतिनिधियों को यहां भेजा।

बसपा प्रमुख मायावती ने इस बैठक में भाग लेने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि अगर ईवीएम पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई होती तो वे जरूर भाग लेतीं। इसी तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकार को पत्र लिख कर बैठक से पहले इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

इसलिए पक्ष में भाजपा

भाजपा 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के पक्ष में है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे भाजपा को पूरे देश में एक मजबूत सरकार बनाने में मदद मिलेगी। अधिकांश सर्वेक्षणों से यह पता चला है कि लोग पीएम मोदी का समर्थन करते हैं।

भाजपा ने घोषणापत्र में किया है शामिल

पूरे देश में एक साथ चुनाव करवाने का मुद्दा भाजपा ने अपने लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी शामिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान भी इसकी कई बार चर्चा की। सरकार का कहना है कि इस कदम से सार्वजनिक धन की बर्बादी रोकी जा सकेगी। साथ ही लगातार होते रहने वाले चुनावों से विकास कार्यों में पड़ने वाली बाधा को दूर किया जा सकेगा।

दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत होगा जरूरी

पिछले साल विधि आयोग यह सिफारिश कर चुका है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ करवाए जाएं। इसी तरह नीति आयोग ने भी कहा है कि दो चरण में पूरे देश में चुनाव करवा लिए जाएं। हालांकि इस तरह का प्रावधान संवैधानिक संशोधन से ही संभव है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।

 

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भ्रम की स्थिति पैदा होती है
एक राष्ट्र, एक चुनाव से कुछ नुकसान भी हैं। जैसे जब चुनाव एक साथ होते हैं तो स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच भ्रम की स्थिति होती है। दरअसल राज्यों के विधानसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़े जाते हैं। जबकि लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर। लेकिन एस साथ चुनाव में स्थानीय मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इससे मतदाताओं को राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों में भ्रम पैदा हो जाता है।

 

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