पत्रिका कीनोट सलोन में बोले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी- आने वाले दिनों में एमएसएमई में दिखेंगे क्रांतिकारी बदलाव

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पत्रिका कीनोट सलोन में सवालों के जवाब दे रहे थे। शो का मॉडरेशन पत्रिका के गिरिराज शर्मा और मुकेश केजरीवाल ने किया। नितिन गडकरी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में 29 प्रतिशत योगदान एमएसएमई का है और अब तक इससे 11 करोड़ रोजगार सुजित हुए हैं।

By: Prashant Jha

Published: 20 May 2020, 01:51 PM IST

नई दिल्ली। पत्रिका कीनोट सलोन में केंद्रीय एमएसएमई और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया कि एमएसएमई सेक्टर को दिए गए तीन लाख करोड़ के पैकेज से इनके पास नकदी की की कमी दूर होगी। ये फिर से मशीन और कच्चा माल खरीदे सकेंगे, श्रमिकों को पैसा मिलेगा और सरकारों को राजस्व मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए विदेशी निवेश भी जरूरी है। इसके बिना तरक्की की बात करना बेमानी है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पत्रिका कीनोट सलोन में सवालों के जवाब दे रहे थे। शो का मॉडरेशन पत्रिका के गिरिराज शर्मा और मुकेश केजरीवाल ने किया। नितिन गडकरी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में 29 प्रतिशत योगदान एमएसएमई का है और अब तक इससे 11 करोड़ रोजगार सुजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे अगले कुछ साल में इससे पांच करोड़ और रोजगार सृजित करना चाहते हैं। इससे लोगों को गांवों में ही रोजगार मिल सकेगा। इन्होंने कहा कि विलेज इंडस्ट्री जो 88 हजार करोड़ की थी, इसे दो साल में 5 लाख करोड़ का करना है।

 

विदेशी निवेश के बिना तरक्की संभव नहीं

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश के बिना तरक्की आसान नहीं है। एक समय मारूति को सुजुकी ने टेकओवर किया तो हम सब ने विरोध किया था। लेकिन आज हमारे ओटोमोबाइल का टर्नओवर 4.50 लाख करोड़ है और दुनिया की सब बड़ी कंपनियां यहां आई हैं। बजाज और टीवीएस जैसी भारतीय कंपनियां 50 फीसदी बाइक निर्यात कर रही है। 1.45 लाख करोड़ का निर्यात है। सबसे ज्यादा रोजगार इसी ने दिया है। अगर विदेशी निवेश नहीं होता तो यह सब नहीं हो पाता। लेकिन इसके साथ जरूरी है कि हम भारतीय उद्योग को बढ़ावा दें, निर्यात को कम करने की भी जरूरत है।

प्रवासी मजदूरों को भरोसा दिलाना होगा

नितिन गडकरी ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों के मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठ कर देखने की जरूरत है। कोरोना वायरस जैसी समस्या पूरे विश्व के सामने पहली बार आई है, इसलिए इसस निपटने में भी कुछ उलझनें आ रही हैं। मजदूरों को विश्वास बहाल कर ही वापस लौटाया जा सकता है। ये मजदूर बिहार या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से दूसरे राज्य इसलिए गए, क्योंकि उनके जिलों या राज्य में रोजगार नहीं थे। ऐसा भी नहीं है कि उद्योग 100 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों से ही चल रहे हैं और उनके जाने से बंद हो जाएंगे। लेकिन इन्हें वापस बुलाना है तो उनका विश्वास कायम करना होगा और डर हटाना होगा। यह बहुत संवेदनशील और जटिल मुद्दा है।

ऑटो डीलर्स को एमएसएमई के दर्जे पर फैसला जल्द

उन्होंने कहा कि एमएसएमई को दिए पैकेज में ऑटो इंडस्ट्री शामिल नहीं है। सरकारी हिसाब में इन्हें वेंडर माना जाता है, जबकि मेरा मानना है कि यह खुद में एक एमएसएमई के तौर पर काम कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन्हें भी पैकेज में शामिल किया जाएगा। मुझे इसको लेकर इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के पत्र मिले हैं, हम जल्द ही इस पर विचार कर कुछ राहत के बारे में काम करेंगे। इन्हें एमएसएमई में शामिल करेंगे। मुश्किल में हम सब हैं, लेकिन इससे बाहर जल्द निकलेंगे।

Prashant Jha
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