25 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अकाली दल ने दी एनडीए से अलग होने की धमकी, गठबंधन को बचाने आगे आए आरएसएस नेता

मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट कर कहा है कि गुरुद्वारों में केंद्र का हस्तक्षेप भाजपा और अकाली दल के बीच टकराव ला सकता है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Dhirendra Kumar Mishra

•

Updated: 31 Jan 2019, 11:22 AM IST

bhagwat

अकाली दल और भाजपा के झगड़े में कूदा आरएसएस, एनडीए से अलग होने की दी धमकी

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले एनडीए में शामिल एक और सहयोगी दल ने अलग होने की धमकी दी है। अब अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट कर कहा है कि गुरुद्वारों में केंद्र का हस्तक्षेप भाजपा और अकाली दल के बीच टकराव ला सकता है। अकाली नेता ने इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से इस मामले में दखल देने की अपील की है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच मतभेद को देखते हुए राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ (आरएसएस) भी बीच बचाव के लिए बीच में कूद पड़ा है।

शाह से समाधान की अपील
मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट किया है कि केंद्रीय सरकार द्वारा गुरुद्वारों में लगातार व्यवधान उत्पन्न करने की वजह से भारत और पूरी दुनिया में अल्पसंख्यक सिखों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। चाहे वो पटना साहिब हो या हुजूर साहिब। मैं, अमित शाह से अनुरोध करता हूं कि इससे पहले ये मुद्दा भाजपा और अकाली दल के बीच टकराव की वजह बने इस ओर ध्यान दें। बता दें कि पिछले एक वर्ष के दौरान कई राजनीतिक दल एनडीए से अलग हो चुके हैं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मनजिंदर सिरसा का ये बयान बेहद अहम माना जा रहा है।

संघ ने लगाया मनमानी का आरोप
दूसरी तरफ आरएसएस की सिख विंग राष्ट्रीय सिख संगत ने कहा है कि अकाली दल हमेशा धार्मिक स्थानों का उपयोग अपने राजनैतिक हितों के लिए करता रहा है। अकाली दल ने अपने राजनीतिक हित और सत्ता के बल पर गुरमीत राम रहीम को माफ करवाया था। संगत ने कहा है कि मनजिंदर सिरसा को पार्टी विधायक रहते हुए पार्टी की आलोचना का अधिकार नहीं है। अकाली दल को तकलीफ है कि अच्छे सिख बोर्ड में आ जाएंगे तो उसकी मनमर्जी कम होगी और तख्‍त साहिब का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए नहीं कर पाएंगे। कहा गया है कि महाराष्ट्र बोर्ड का निर्णय सरकार का निर्णय है क्योंकि वह कानून के तहत होता है. इससे पहले भी कानून में सरकार की जिम्मेदारी रखी गई है कि अच्छे सिखों को समाज सेवा और श्री तख्त साहिब के लिए आगे लाए।