
Lok Sabha Speaker Om Birla
नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष एवं कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र में सडक़ सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सेव लाइफ फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसका उद्देश्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में "जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम" को प्रभावी ढंग से लागू कर सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम स्तर तक लाना तथा दीर्घकालिक रूप से शून्य मृत्यु दर सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना रहा।
बैठक के दौरान बिरला ने सडक़ दुर्घटनाओं में हो रही मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सडक़ हादसों में सबसे अधिक जानें युवाओं की जाती हैं, जो न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि राष्ट्र की उत्पादक शक्ति का भी नुकसान है। सडक़ सुरक्षा केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है और इसे जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है।
बिरला ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाना नहीं, बल्कि कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र को जीरो फेटेलिटी मॉडल के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यदि समन्वित प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में सडक़ दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है और अंतत: इसे शून्य के करीब पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील स्थलों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, शहरी स्थानीय निकायों, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में सेव लाइफ फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ लोक सभा अध्यक्ष के ओएसडी राजेश गोयल भी उपस्थित रहे।
बैठक में ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत विस्तृत अध्ययन और आंकड़ों पर चर्चा की गई। फाउंडेशन ने बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की मृत्यु सडक़ दुर्घटनाओं के कारण होती है। अध्ययन में ऐसे 21 अति गंभीर सडक़ कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जहां लगभग 50 प्रतिशत सडक़ दुर्घटना जनित मौतें होती हैं। इसके अतिरिक्त, 19 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां बार-बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के कारण लगभग 25 प्रतिशत मौतें होती हैं।
वहीं 12 अत्यंत संवेदनशील पैदल यात्री दुर्घटना स्थलों की पहचान की गई है, जहां लगभग 20 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतें दर्ज की गई हैं। फाउंडेशन ने यह भी बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र के लगभग 60 पुलिस थाना क्षेत्रों में से 25 थाना क्षेत्र ऐसे हैं जहां कुल सडक़ दुर्घटना मृत्यु का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। अध्ययन के अनुसार तेज गति और खतरनाक ओवरटेकिंग जैसी लापरवाह ड्राइविंग लगभग 24 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतों का प्रमुख कारण है। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में कोटा-बूंदी क्षेत्र में सडक़ दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है, जो सडक़ सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का सकारात्मक संकेत है।
Published on:
25 Jun 2026 10:54 am
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
