
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी जंग बुधवार को भी जारी है। शिवसेना नेता संजय राउत ने ताजा बयान में कहा है कि मुख्यमंत्री पद पर जो सहमति बनी थी उसी पर हमने चुनाव लड़ा था। सहमित के आधार पर ही चुनावी गठबंधन हुआ था। इसलिए नए प्रस्ताव पर चर्चा करने का सवाल ही नहीं है। न तो कोई प्रस्ताव आएगा और न ही हमारी तरफ से कोई नया प्रस्ताव जाएगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना ने चुनावों से पहले सीएम पद को लेकर एक समझौता किया था। उसी आधार पर शिवसेना एक साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुई थी।
संजय राउत ने एक बार फिर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि जिस मुद्दे पर सहमित बनी थी सरकार गठन की बात भी सिर्फ उसी आधार पर होनी चाहिए।
राष्ट्रपित शासन लगाना जनता के साथ अन्याय होगा
संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाना जनता के साथ अन्याय होगा। महाराष्ट्र अगर राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रहा है तो उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।
बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) चीफ मोहन भागवत से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में सरकार गठन को लेकर चर्चा हुई थी।
सस्पेंस बरकरार
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आए 13 दिन बाद भी दोनों राजनीतिक पार्टियों में बात सरकार बनाने को लेकर सहमित नहीं बन पा रही है। दोनों पार्टियों ने चुनाव साथ मिलकर लड़ा लेकिन सरकार गठन पर दोनों पार्टियों की राहें अलग-अलग हो गईं। सरकार गठन पर स्थिति अब तक साफ नहीं हो सकी है।
दरअसल, शिवसेना अड़ी हुई है कि राज्य में 50-50 फॉर्मूले के तहत ढाई-ढाई साल के लिए दोनों पार्टियों का मुख्यमंत्री हो। माना जा रहा है कि बीजेपी इस बात पर तो सहमत है कि मंत्रालय में शिवसेना की हिस्सेदारी पचास फीसदी हो। मगर पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री और गृहमंत्री बीजेपी का ही होगा।
Updated on:
06 Nov 2019 03:31 pm
Published on:
06 Nov 2019 11:39 am
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