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Sonia Gandhi Meeting: सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों से किया आह्वान, 2024 के चुनाव के लिए मिलकर बनाएं रणनीति

Sonia Gandhi Meeting: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तमाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत 19 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

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Sonia Gandhi Meeting With Opposition Leaders Of 19 Parties Including Sharad Pawar And Mamta Banerjee

Sonia Gandhi Meeting: नई दिल्ली। मोदी सरकार को घेरने के लिए और आगामी लोकसभा (Lok Sabha Election 2024) चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कवायद शुरू कर दी है। शुक्रवार को सोनिया गांधी तमाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर रही हैं। इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत 19 विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे। इस बैठक में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए, जबकि आम आदमी पार्टी को आमंत्रित नहीं किया गया था।

बैठक में सोनिया गांधी ने कहा, मुझे विश्वास है कि संसद के आने वाले सत्रों के दौरान भी विपक्ष की एकता कायम रहेगी। हमारा लक्ष्य 2024 का लोकसभा चुनाव है और इसके लिए हमें एक व्यवस्थित तरीके से योजना बनानी होगी। हमारे लिए एक चुनौती है। हमें मिलकर ऐसा करना होगा, क्योंकि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। हम सभी की अपनी-अपनी मनजबूरियां है, लेकिन राष्ट्रहित में हम सभी को एकसाथ आना चाहिए।

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जानकारी के अनुसार, वर्चुअली आयोजित इस बैठक में कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी के अलावा डीएमके, शिवसेना, जेएमएम, सीपीआई, सीपीएम, नेशनल कॉन्फ्रेंस, आरजेटी, आईयूडीएफ, वीसीके, लोकतांत्रिक जनता दल, जेडीएस, आरएलडी, आरएलडी, आरएसपी, केरल कांग्रेस मनी, पीडीपी, आईयूएमएल के प्रतिनिधि शामिल हैं। बैठक में राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया। वहीं शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन, एमके स्टालिन, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला, बदरुद्दीन अजमल समेत कई नेता बैठक में शामिल हुए।

2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष को बनानी होगी रणनीति: सोनिया गांधी

कांग्रेस अंतरिम प्रमुख सोनिया गांधी ने बैौठक में कहा कि अंतिम लक्ष्य 2024 का लोकसभा चुनाव है, जिसके लिए हमें अपने देश को स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों और हमारे संविधान के सिद्धांतों और प्रावधानों में विश्वास करने वाली सरकार देने के उद्देश्य से व्यवस्थित रूप से योजना बनाना शुरू करना होगा।

सरकार के सार्वजनिक महत्व के जरूरी मुद्दों पर चर्चा और बहस करने की अड़ियल और अहंकारी अनिच्छा के कारण संसद का मॉनसून सत्र फिर से पूरी तरह से बर्बाद हो गया। इनमें पेगासस कांड शामिल है जो प्रत्येक नागरिक को प्रभावित करता है, तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करना- पिछले 9 महीनों से किसानों का आंदोलन, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और संघवाद और हमारे लोकतंत्र की संस्थाओं पर हमला शामिल है।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बैठक में विपक्षी नेताओं दलों के सभी मुख्यमंत्रियों ने कहा कि विपक्ष को एकजुट होना होगा क्योंकि गैर भाजपा राज्य सरकारों को परेशान किया जा रहा है। हमें साथ आना होगा और केंद्र सरकार का सामना करना होगा।

सभी मुद्दों को हल करने में फेल रही वर्तमान सरकार: शरद पवार

NCP प्रमुख शरद पवार ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि सोनिया गांधी जी की पहल पर आज समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों की बैठक संपन्न हुई। वर्चुअली आयोजित की गई इस बैठक में सम्मिलित होकर अपने विचार व्यक्त किए। एक समयबद्ध कार्यक्रम को सामूहिक रूप से शुरू करने की आवश्यकता है और मैं ये सुझाव देता हूं कि इन सभी मुद्दों को एक साथ निपटने के बजाय, हमें प्राथमिकता तय कर के सामूहिक रूप से इन मुद्दों को सुलझाने के लिए और अपने देश को एक अच्छा वर्तमान और भविष्य देने के लिए कार्य करना चाहिए।

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वर्तमान सरकार इन सभी मुद्दों को हल करने में विफल रही है। जो लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं; जो लोग हमारे देश के लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बचाने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं, उन्हें एक साथ आना चाहिए, ऐसा मेरा आह्वान है।

उन्होंने आगे कहा कि किसान कई महीनों से विरोध कर रहे हैं, यह भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए एक दर्दनाक तस्वीर है। आर्थिक मंदी, कोविड महामारी, बेरोजगारी, सीमा विवाद, अल्पसंख्यक समुदायों का मुद्दा आदि कई मुद्दों का राष्ट्र आज सामना कर रहा है। मैं वास्तव में हमारे देश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस अति आवश्यक बैठक के आयोजन के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करता हूं। भारत में वर्तमान परिदृश्य बहुत निराशाजनक प्रतीत होता है।

विपक्ष ने की राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग

सोनिया गांधी के साथ बैठक के बाद तमाम विपक्षी दलों ने एक साझा बयान में केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग की। विपक्ष ने कहा कि संसद में अभूतपूर्व दृश्य देखे गए जहां मार्शलों द्वारा महिला सांसदों सहित अन्य सांसदों को घायल कर दिया गया। विपक्ष को महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के उनके अधिकार से वंचित करने के अलावा, सरकार ने भारी हंगामे के बीच कई कानूनों को बिना चर्चा के पास कराया।

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विपक्ष ने कहा कि जिस तरह से केंद्र ने संसद के मानसून सत्र को बाधित किया, चर्चा करने से इनकार कर दिया, पेगासस स्पाइवेयर के अवैध उपयोग का जवाब देने, किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने, कोविड -19 के कुप्रबंधन, मुद्रास्फीति और मूल्य वृद्धि पर चर्चा नहीं की, उसकी हम निंदा करते हैं।

विपक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करें। केंद्रीय सेवाओं के जम्मू-कश्मीर कैडर सहित पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करें। जल्द से जल्द स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराएं। हम केंद्र से तीन कृषि विरोधी कानूनों को निरस्त करने और किसानों को एमएसपी की अनिवार्य गारंटी देने की मांग करते हैं। भीमा कोरेगांव मामले और सीएए के विरोध में कठोर यूएपीए के तहत जेलों में बंद सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करें।