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ओवैसी को विपक्षी बैठक में नहीं बुलाने पर भड़के सपा सांसद, बोले- ये कैसी एकता, जिसमें मुस्लिमों के लिए जगह नहीं

Lok Sabha 2024: विपक्षी दलों की तरफ से 23 जून को हुई पटना बैठक में AIMIM ओवैसी को न बुलाए जाने पर समाजवादी पार्टी के सांसद एस टी हसन भड़क गए।

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सपा सांसद एस टी हसन

अगले साल होने वाली लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर देश की 18 विपक्षी पार्टियों की एक बैठक 23 जून को पटना में बुलाई गई थी। लेकिन इस बैठक में इन दलों ने ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को शामिल नहीं किया था। विपक्षी दलों की तरफ से बैठक में ओवैसी को न बुलाए जाने पर समाजवादी पार्टी के सांसद एस टी हसन भड़क गए।

उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर बिफरते हुए कहा कि ये कैसी विपक्षी एकता जिसमें अल्पसंख्यकों के लिए जगह ही नहीं है। हम उम्मीद करते है कि आगे होने वाली बैठकों में AIMIM को शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि इस बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव शामिल हुए थे।

AIMIM को शामिल करें पार्टियां- एस टी हसन
सपा सांसद एसटी हसन ने 23 जून को पटना में हुई विपक्षी पार्टियों की बैठक में असदुद्दीन ओवैसी को नहीं बुलाए जाने पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि ये कैसी विपक्षी एकता है कि देश में अल्पसंख्यक समाज के लोगों की आवाज उठाने वाली पार्टी के मुखिया को ही नहीं बुलाया गया। ये कैसी विपक्षी एकता है, जिसमें देश के अल्पसंख्यकों के लिए जगह ही नहीं है।

ओवैसी को शामिल करें विपक्षी दल
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि ओवैसी को भी विपक्षी एकता की बैठक में बुलाया जाना चाहिए था। लेकिन उन लोगों (विपक्ष के नेताओं) ने उन्हे नहीं बुलाया। मेरा सुझाव है कि अभी भी समय बहुत नहीं निकला है, उन्हें आगे होने वाली बैठकों में शामिल करके विपक्ष को आगे बढ़ना चाहिए। सभी पार्टियों को एकजुट होना चाहिए।

लोकसभा चुनाव 2024 में सबको मिलकर ही भाजपा का मुकाबला करना होगी। बता दें कि एस टी हसन 2019 में सपा की टिकट पर मुरादाबाद से लोकसभा में पहुंचे थे। वहीं, इस बैठक में उनकी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी पहुंचे थे।

ओवैसी को BJP की B टीम मानती है पार्टियां
ये बात किसी से छिपी नहीं है कि देश की सभी विपक्षी पार्टियां मुस्लिम वोटों पर अपना एकाधिकार चाहती है। इसलिए वह ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को किसी भी तरीके से अपने राज्यों में घुसने नहीं देना चाहती है। वह जानती है कि अगर ओवैसी उनके राज्यों में मुसलमानों के बीच जगह बनाने में कामयाब हो गए तो फिर उन्हें चुनाव जीतने में दिक्कत होने लगेगी।

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बिहार विधानसभा चुनाव में बिगाड़ा था खेल
इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2020 में देखने को मिला जहां बिहार में ओवैसी की AIMIM ने 5 सीटें जीतकर प्रदेश में राजद का खेल बिगाड़ दिया था और भाजपा-जेडीयू की सरकार बन गई थी। हालांकि 2022 में नीतीश भाजपा से अलग होकर राजद के साथ गठबंधन कर लिया और राजद ने भी ओवैसी के 5 में से 4 विधायकों को अपने पार्टी में शामिल कर लिया था।

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