
तेलंगाना: केसीआर ने दिए विधानसभा भंग करने के संकेत, दिसंबर में हो सकता है चुनाव
नई दिल्ली। रविवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की विशाल रैली को हैदराबाद में संबोधित करने के बाद सीएम के चंद्रशेखर राव में विधानसभा का चुनाव समय से पहले कराने का संकेत दिया है। उनके इस संकेत के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि वो राज्यपाल को विधानसभा भंग कर चुनाव कराने को लेकर जल्द ही सलाह दे सकते हैं। हैदराबाद के बाहर हुई रैली में सीएम ने साफ संदेश दिया कि कैबिनेट सहयोगियों और पार्टी के विधायकों के साथ उनकी इस मसले पर बातचीत हुई है और उन्होंने अपनी रजामंदी दे दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स को नहीं ठहराया गलत
विशाल रैली को संबोधित करते हुए केसीआर ने जल्द विधानसभा चुनाव कराने को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स को गलत नहीं ठहराया। न ही समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने से उन्होंने इनकार किया। तय है कि सीएम केसीआर के इरादे बिल्कुल साफ हैं। वह जल्दी चुनाव नहीं चाहते हैं। वह 10 सितंबर से पहले विधानसभा भंग कर देंगे। अब इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि वो विधानसभा भंग करने की घोषणा छह सितंबर को कर सकते हैं। छह नंबर केसीआर का लकी नंबर है। इसलिए इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर के शुरुआत में विधानसभ्ज्ञा चुनाव हो जाए।
एनडीए में जाने के संकेत
अगर अप्रैल-मई तक लोकसभा चुनाव के साथ ये चुनाव हुए तो इससे कांग्रेस को फायदा मिल सकता है। खासकर आंध्र प्रदेश में मोदी विरोधी भावनाओं से कांग्रेस को तेलंगाना में मजबूती मिलने के आसार हैं। इसलिए केसीआर की पार्टी कांग्रेस को मौका नहीं देना चाहती है। अपने फैंस में बेहद लोकप्रिय हैं के चंद्रशेखर राव बीते दो महीनों में तीन बार पीएम नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं। संकेत है कि वह एनडीए में जा सकते हैं। चार और और 25 अगस्त को केसीआर और मोदी की बीच हुई मीटिंग के बाद केसीआर ने एक के बाद एक सेगमेंट पर रियायत देने की घोषणा शुरू कर दी है। इस रियायतों में एससी-एसटी के लिए फ्री बिजली, मुसलमानों के लिए चार से 12 फीसदी कोटा बढ़ाए जाने की मांग और बेरोजगार युवाओं के लिए योजना शामिल है। पीएम मोदी और केसीआर की मीटिंग के दौरान उन्होंने तेलंगाना चुनाव के लिए मोदी का समर्थन मांगा था। यह समर्थन केसीआर को लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ लड़ने को लेकर मजबूती दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि तेलंगाना के चुनाव राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ ही कराए जाएं। केंद्र सरकार ने भी उन्हें लगातार यह विश्वास दिलाया है कि इस साल नवंबर-दिसंबर में चुनाव होते हैं तो केंद्र सरकार कोई परेशानी नहीं होने देगी।
Published on:
03 Sept 2018 02:06 pm
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