
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: X/@Dev_Fadnavis @mieknathshinde)
महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है, लेकिन उससे पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। अंबरनाथ के बाद अब लातूर की राजनीति में भूचाल आ गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसी सियासी चाल चली है जिसने भाजपा और कांग्रेस दोनों को बैकफुट पर धकेल दिया है। लातूर महानगरपालिका चुनाव में उतरे 38 निर्दलीय उम्मीदवार आज शिवसेना शिंदे गुट में शामिल होने जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, लातूर महानगरपालिका चुनाव से पहले 38 निर्दलीय उम्मीदवार आज शाम मुंबई में एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में आधिकारिक रूप से शिवसेना का दामन थामेंगे। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि शिंदे की यह रणनीति लातूर में गेमचेंजर साबित हो सकती है।
महाराष्ट्र के लातूर के कुल 18 प्रभागों की 70 सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। दलीय स्थिति की बात करें तो भाजपा सभी 70 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। जबकि कांग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाडी से हाथ मिलाया है, इसलिए कांग्रेस 65 और वंचित 5 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ रही हैं।
वहीं, एनसीपी (अजित पवार) 60 सीटों पर आधिकारिक और 10 पर पुरस्कृत उम्मीदवार उतारे है।
एनसीपी (अजित पवार) 60 सीटों पर अपने उम्मीदवार और 10 सीटों पर समर्थित उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। वहीं, एनसीपी शरद पवार गुट 17 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है।
शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने केवल 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन अब 38 निर्दलीयों के आने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) ने 9 और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी 9 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं।
लातूर पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है, जिसे 2017 में भाजपा ने ढहा दिया था। अब एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में निर्दलीयों को अपने पाले में लाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल 11 सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहते। इन निर्दलीयों के समर्थन से अब शिवसेना (शिंदे) लातूर महानगरपालिका की सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखने की स्थिति में आ सकती है।
2017 के चुनाव में भाजपा ने संभाजी पाटिल निलंगेकर के नेतृत्व में 36 सीटें जीतकर शहर की सत्ता हासिल की थी। तब कांग्रेस को 31 सीटों पर संतोष करना पड़ा था, जबकि शिवसेना अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। लेकिन इस बार शिंदे के मास्टरस्ट्रोक ने लातूर की चुनावी दिशा बदल दी है।
ठाणे जिले के अंबरनाथ शहर में बुधवार को एक ही दिन में बड़ी सियासी उठापटक देखने को मिली। भाजपा से गठबंधन करने के आरोप में कांग्रेस पार्टी ने अपने 12 नगरसेवकों को निलंबित कर दिया, जिन्होंने रात होते-होते भाजपा का दामन थाम लिया।
दरअसल, शिवसेना शिंदे गुट को अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता से दूर रखने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ हाथ मिलाकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' बनाई थी। मगर कुछ ही घंटे बाद ही यह गठबंधन टूट गया। इसके बाद अंबरनाथ की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल और हाल ही में चुनकर आए सभी 12 नगरसेवकों (पार्षदों) को पार्टी से निलंबित कर दिया। साथ ही अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी को भी बर्खास्त कर दिया। प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया कि अंबरनाथ इकाई ने प्रदेश कार्यालय को बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के भाजपा के साथ गठबंधन किया, जो कि पार्टी अनुशासन का खुला उल्लंघन है।
अंबरनाथ नगर निकाय सदन में कुल 60 सदस्य हैं। 20 दिसंबर को हुए चुनावों में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को चार सीट मिलीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते थे। शिंदे सेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार) के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' गठबंधन बनाया और बहुमत हासिल कर लिया। इस बेमेल गठबंधन को एक निर्दलीय ने भी समर्थन दिया। जिससे भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल अंबरनाथ नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं। हालांकि, शिंदे की शिवसेना ने इस गठबंधन को अनैतिक और अवसरवादी बताया और भाजपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की।
Published on:
08 Jan 2026 05:06 pm
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