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घरों में अधिकतम 24 अंगुली और पंडालों में आदमकद से ऊंची नहीं होनी चाहिए प्रतिमाएं, मूल रूप में ही होना चाहिए प्रतिमा का निर्माण

  - शहर के पंडितों का मत, घरों में सुख समृद्धि के लिए रिद्धि सिद्धि के साथ स्थापित करे प्रतिमाएं, अगर अकेले गणेश प्रतिमा है तो सुपारी की रिद्धि सिद्धि की भी कर सकते हैं स्थापना - पंडालों में भी इतनी बड़ी स्थापित करनी चाहिए प्रतिमा कि प्रतिमा के चरणों में खड़े होकर कर सके पूजा अर्चना

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घरों में अधिकतम 24 अंगुली और पंडालों में आदमकद से ऊंची नहीं होनी चाहिए प्रतिमाएं, मूल रूप में ही होना चाहिए प्रतिमा का निर्माण

घरों में अधिकतम 24 अंगुली और पंडालों में आदमकद से ऊंची नहीं होनी चाहिए प्रतिमाएं, मूल रूप में ही होना चाहिए प्रतिमा का निर्माण

भोपाल


शहर में गणेश प्रतिमाओं को मूर्तिकार जगह-जगह अंतिम आकार देने लगे हैं। गणेश उत्सव में भगवान गणेश की स्थापना घरों से लेकर चौक चौराहों पर की जाती है। इस दौरान कई स्थानों पर काफी ऊंची-ऊंची प्रतिमाएं स्थापित की जाती है, साथ ही कई मूर्तिकार प्रतिमा के मूल स्वरूप के अलावा अलग-अलग आकार देते हैं। शहर के पंडितों का कहना हैं कि घरों में गणेश प्रतिमाओं की ऊंचाई अधिकतम 24 अंगुल यानि एक हाथ होनी चाहिए, इसी प्रकार सार्वजनिक पंडालों में भी आदमकद से बड़ी प्रतिमा नहीं होनी चाहिए। इसी प्रकार प्रतिमा के स्वरूप में भी छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

शहर में गणेश उत्सव की तैयारियां जोर शोर से चल रही है। गणेश चतुर्थी 10 सितम्बर को है, इसी के साथ इस उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। गणेश उत्सव में शहर में 40 हजार से अधिक घरों में गणेशजी की स्थापना की जाती है, वहीं शहर में पंडाल सजाकर भी 2 हजार से अधिक स्थानों पर स्थापना होती है। प्रतिमाओं की ऊंचाई को लेकर शहर के पंडितों का भी कहना है कि प्रतिमाओं की ऊंचाई अधिक नहीं होनी चाहिए। अधिक से अधिक प्रतिमा इतनी ऊंची होनी चाहिए कि हम प्रतिमा के चरणों में खड़े रहकर मस्तक पर चंदन तिलक लगा सके। इससे ज्यादा ऊंची प्रतिमाओं की स्थापना शास्त्र सम्मत नहीं है। ऊंची प्रतिमाओं की विधि विधान से पूजन में परेशानी आती है।

प्रतिमाओं को नहीं देना चाहिए अनाधिकृत आकार
पं. विष्णु राजौरिया का कहना है कि घरों में प्रतिमा 9 अंगुल से 24 अंगुल अर्थात एक हाथ इनती ऊंची होनी चाहिए। प्रतिमाओं को उनके मूल स्वरूप में ही आकार देना चाहिए। आजकल कई लोग प्रतिमाओं के अलग-अलग स्वरूप बनाते हैं, यह शास्त्र सम्मत नहीं है। इससे प्रतिमाओं का उपहास होता है। देवी देवता सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है। इसलिए शास्त्रीय विधि अनुसार ही प्रतिमाओं को आकार देना चाहिए। गृहस्थ जीवन में रिद्धि सिद्धि के साथ गणेशजी की स्थापना करना विशेष फलदायी है। अगर अकेले गणेशजी की प्रतिमा है, तो सुपारी के रिद्धि सिद्धि की भी स्थापना कर सकते हैं। जहां तक गणेशजी की सूंड की बात है, उसे लेकर जो धारणाएं बनी है, वह अलग-अलग है। सूंड किसी भी ओर हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

गणेशजी की सूंड का अलग-अलग महत्व


ज्योतिषाचार्य अंजना गुप्ता का कहना है कि घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। गणेशजी की सूंड का अलग-अलग महत्व है। गणेशजी की सूंड दाई ओर घूमी होती है, ऐसी प्रतिमा का पूजन विघ्न बाधा, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, शक्ति प्रदर्शन आदि के लिए फलदायी है। बायी ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है, जैसे शिक्षा,धन प्राप्ति, व्यवसाय उन्नति, संतान सुख, विवाह, पारिवारिक खुशहाली आदि। बायी ओर घुमी सूंड वाले गणेशजी विघ्न विनाशक कहलाते हैं। इसी प्रकार सीधी सूंड वाली प्रतिमा की आराधना रिद्धि सिदि, कुंडलिनी जागरण, मोक्ष आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। इनकी पूजा काफी कठिन होती है। संत समाज, सन्यासी लोग विशेष कार्यों की सिद्धि के लिए इसकी आराधना करते हैं।