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भगवा रंग में रंगा हिमाचल, लेकिन CM इन वेटिंग नहीं निकाल पाए अपनी सीट

हर पांच वर्ष में सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड जारी रखते हुए देवभूमि की जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर भाजपा को सत्तासीन कर दिया।
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नई दिल्ली

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ashutosh tiwari

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Updated: 18 Dec 2017, 5:42 PM IST

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शिमला। देशभर में मोदी लहर के बीच अब हिमाचल भी भगवा रंग में रंग गया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी जीत मिली है। हालांकि उसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और पार्टी के कद्दावर नेता प्रेमकुमार धूमल के चुनाव हार जाने से भगवा खेमे के रंग में भंग भी पड़ा। बहरहाल, हर पांच वर्ष में सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड जारी रखते हुए देवभूमि की जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर भाजपा को सत्तासीन कर दिया। चुनाव में कई निर्वतमान मंत्री और पूर्व मंत्री भी चुनाव हार गए। कुल 68 सीटों वाली विधानसभा में इस बार भाजपा को 44 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। दो सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है। शिमला के ठियोग में माकपा प्रत्याशी की जीत हुई है।

तथ्य यह भी है कि प्रदेश में मोदी का मैजिक देखने को मिला। पीएम ने जहां जहां रैलियां कीं, वहां भाजपा को जीत मिली है। दोनों बड़े जिलों कांगड़ा और मंडी में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। पंद्रह और दस सीटों वाले इन दोनों जिलों में कांग्रेस का एक तरह से सफाया हो गया। कांगड़ा में भाजपा ने 11 और मंडी में दस में से नौ सीटें अपनी झोली में डालीं। पिछले बार कांगड़ा से 10 सीटें जीतने वाली कांग्रेस को कांगड़ा में 3 ही सीटें मिल सकीं। मंडी में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। जिले में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिल सकी है। जिले से नौ सीटें भाजपा और एक निर्दलीय को मिली है। दो दर्जन सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा।

दिग्गज हो गए धराशाई
भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती भी चुनाव हार गए। शांता कुमार को नजरअंदाज कर पालमपुर से उतारी गई इंदु गोस्वामी भी नहीं जीत सकीं। कांग्रेस सरकार के कद्दावर मंत्रियों में जीएस बाली, सुधीर शर्मा, ठाकुर सिंह भरमौरी, प्रकाश चौधरी अपनी सीट नहीं बचा सके। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री डा धनीराम शांडिल, ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया अपनी सीट बचाने में कामयाब हो गए। हालांकि शांडिल बहुत करीबी मुकाबले में अंत तक कांटे की टक्कर में फंसे रहने के बाद कामयाब होने में सफल रहे।

काम कर गई मोदी की डबल इंजन की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रदेश में विकास के डबल इंजन की बात लोगों को भा गई। अपील का नतीजा यह हुआ कि भाजपा शिमला, कांगड़ा और मंडी जैसे बड़े जिलों में पूरी तरह हावी हो गई और कांग्रेस से सात फीसदी से ज्यादा का वोट शेयर हासिल कर 44 सीटें जीत लीं। भाजपा को इन चुनावों में जहां 48.4 फीसदी मत मिले, वहीं कांग्रेस को 41.9 फीसदी मत ही मिल सके।

बसपा से ज्यादा दबा नोटा का बटन
2017 के विधानसभा चुनावों में इस बार लोगों ने बहुजन समाजवादी पार्टी जैसे राष्ट्रीय दल से ज्यादा नोटा को पसंद किया। प्रदेश के 30 हजार 558 मतदाताओं ने चुनाव मैदान में उतरे किसी भी प्रत्याशी पर विश्वास नहीं जताया। वहीं, बहुजन समाज पार्टी को सिर्फ 15 हजार 800 वोट ही हासिल हुए। निर्दलीय प्रत्याशियों ने कुल मतदान प्रतिशत का 6.3 फीसदी मत हासिल किया जबकि सीपीएम को 1.6 फीसदी वोट हासिल हुए।

फिर तीन महिलाएं ही करेंगी आधी आबादी का नेतृत्व
पिछले विधानसभा चुनावों की ही तरह इस बार भी चुनावों में केवल तीन महिला प्रत्याशी ही जीत हासिल कर सकीं। इनमें डलहौजी से आशा कुमारी के अतिरिक्त शाहपुर से सरवीन चौधरी, इंदौरा से रीता धीमान शामिल हैं।