
क्या 6 हजार रुपए सालाना की आमदनी से बदल जाएगी किसानों की किस्मत?
नई दिल्ली। तीन राज्यों में किसानों की नाराजगी से सत्ता गंवाने वाली मोदी सरकार ने अंतरिम बजट में किसानों को राहत देने की कोशिश की है। लेकिन सरकार की ओर से दो हेक्टेयर वाले किसानों को 6 हजार रुपए प्रति वर्ष देने की घोषणा पर देश के किसानों ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सरकार की ओर से राहत के बाद किसानों का कहना है कि साल में एक बार 6 हजार रुपए मिलने से क्या हम लोग पूरी तरह से कर्जमुक्त हो जाएंगे। किसानों को फसलों को उचित मुआवजा मिलने लग जाएगा। या किसान तंगी में आकर आत्महत्या करना छोड़ देंगे?
ऊंट के मुंह में जीरे जैसा
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के संसदीय क्षेत्र पीलीभीत के किसान इसरार अहमद बताते हैं कि सरकार ने किसानों को कुछ तो देने की पहल की। लेकिन ये राहत ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कि इससे किसानों के आंसू सूख नहीं पाएंगे। सरकार की घोषणा के हिसाब से 5 सौ रुपए प्रतिमाह किसानों को मिलेगा। इससे क्या होगा, अगर यही लाभ सीधे किसानों को दिया जाता या सरकार फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ा देती तो कुछ भला भी होता। उन्होंने कहा, सरकार को सबकुछ पता है। सरकार को किसानों की समस्याओं की जड़ पर चोट करने की जरूरत है। न कि पत्ते गिनने की।
सरकारी नौकरी दे सरकार
मेरठ के किसान उमेश शर्मा का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में खेती में हो रहे नुकसान के कारण सरकारी रिकार्ड के अनुसार तीन लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। यह विषय पूरे देश के लिए शर्मनाक है। यह सिलसिला आज भी रुक नहीं पा रहा है। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों का पुनर्वास करते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
जमीनी हकीकत कुछ और है
गौतबुद्ध नगर के किसान कपिल कौशिक का कहना है कि सरकार का रुख किसानों को लेकर सकारात्मक है। लेकिन किसानों की समस्या का समाधान केवल नीतियों और घोषणाओं से होने वाला नहीं है। सरकार को चाहिए कि वो जमीनी हकीकत को समझे।
सकारात्मक कदम
दिल्ली के किसान गौरव वशिष्ठ का कहना है कि किसानों के लिए सरकार ने कुछ करने की कोशिश की है। लेकिन किसान भारी कर्ज में डूबा है। उसे फसलों के उचित मूल्य नहीं मिलते। सरकार द्वारा तय मूल्य भी मंडी में नहीं मिलते। सरकार को चाहिए कि अपनी घोषणाओं पर प्रभावी तरीके से अमल करे। इतना ही नहीं सरकार कोई ऐसा कदम उठाए जिससे किसान सही मायने में किसानों का बोझ हल्का हो सके।
12 करोड़ किसानों को मिलेगा लाभ
आपको बता दें कि मोदी सरकार ने अपने अंतरिम बजट में दो हेक्टेयर से कम खेत वाले किसानों को 6 हजार रुपए सालाना देने की घोषणा की है। देश में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 12 करोड़ किसान हैं। यानी इतने ही लोगों को इस घोषणा का लाभ मिलेगा। पहली दिसंबर 2018 से इस योजना को लागू किया जाएगा। जल्द ही सूचियां बना कर उनके खाते में इसकी पहली किस्त भेजी जाएंगी। यह राशि तीन बराबर किस्तों में दी जाएगी। इसके लिए सरकार पर 75 हज़ार करोड़ सालाना का खर्च बढ़ेगा। बताया जा रहा है कि किसानों की आय दोगुना करने के लिए सरकार ने ये कदम उठाए हैं। इसके साथ ही 22 फसलों का न्यूनतम सर्मथन मूल्य बढ़ाने की भी घोषणा की गई है।
किसानों की मांगें:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैधानिक दर्जा देते हुए देश के किसानों की सभी फसलों का (फल, सब्जियां व दूध) वैधानिक उचित और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य डॉ स्वामीनाथन द्वारा सुझाए गए बी2 फार्मूले के मुताबिक वास्तविक लागत के आधार पर तय किया जाए। सभी फसलों की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की गारंटी दी जाए।
- देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज माफ किए जाएं। देश के किसानों पर लगभग 80 प्रतिशत कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है।
- राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक से किसानों के ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले डीजल इंजन को कर मुक्त किया जाए।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव करते हुए प्रत्येक किसान को इकाई मानकर सभी फसलों में स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाए।
- किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए। लघु एवं सीमांत किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 5000 रुपए मासिक पेंशन दी जाए।
- जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु क्षेत्रीय आधार पर वृहद कार्य योजना बनाई जाए। देश के कुछ राज्यों में प्रचलित अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए।
- किसानों का बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब कराया जाए। चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपए प्रति किलो तय किया जाए।
- किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप की बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
- पिछले 10 वर्षों में खेती में हो रहे नुकसान के कारण सरकारी रिकार्ड के अनुसार तीन लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। यह विषय पूरे देश के लिए शर्मनाक है। यह सिलसिला आज भी रुक नहीं पा रहा है। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों का पुनर्वास करते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- मनरेगा को खेती से लिंक किया जाए।
- खेती में काम आने वाली सभी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए।
- कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखा जाए।
- देश में पर्याप्त मात्रा में पैदावार वाली फसलों का आयात बंद किया जाए।
- देश में सभी मामलों में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 से ही किया जाए। भूमि अधिग्रहण को केन्द्रीय सूची में रखते हुए राज्यों को किसान विरोधी कानून बनाने से रोका जाए।
Updated on:
01 Feb 2019 03:05 pm
Published on:
01 Feb 2019 01:51 pm
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