
youth congress agitation
अजमेर. स्मार्ट सिटी योजना में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ युवा कांग्रेस ने बुधवार से अजमेर बचाओ भ्रष्टाचारी भगाओ अभियान शुरू किया। विभिन्न इलाकों में ई-रिक्शा रथ निकालकर आमजन को भ्रष्टाचार की जानकारी दी गई।
आगरा गणेश मंदिर पर पूजा-अर्चना कर ई-रिक्शा रथ निकाल गया। युवा कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता नया बाजार ,पुरानी मंडी, नगर निगम, खाइलैंड मार्केट तक पेम्पलेट बांटते साथ चले। जिलाध्यक्ष मोहित मल्होत्रा ने कहा कि अजमेर स्मार्ट सिटी योजना में 100 करोड़ रुपए की लागत से विवादित निर्माण कराए गए। इनमें लिप्त अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया। दोषियों को सजा दिलाना जरूरी है।
इस दौरान पूर्व शहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष विजय जैन, महिला शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष हितेश्वरी टाक, सेवादल जिला अध्यक्ष देशराज मेहरा ने अजमेर बचाओ भ्रष्टाचारी भगाओ के रथ को हरी झंडी दिखाई। सचिव सागर मीणा ने बताया रथ को सभी 80 वार्ड में घुमा कर आमजन को घोटाले की जानकारी दी जाएगी। साथ ही दोषी अधिकारियों के वेतन से 100 करोड़ की राशि वसूलने की मांग की जाएगी।
पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष लोकेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सेवादल, महिला कांग्रेस के कार्यकर्ता 24 अप्रेल को कलक्ट्रेट पर धरना देंगे। प्रदेश युवा कांग्रेस सचिव अकबर हुसैन, मनीषा मीणा, पवन ओड,शोएब अख्तर, पार्षद ईश्वर राजोरिया, अकबर काठात, अंकित पंवार, ओमप्रकाश मंडावर, दीपक वर्मा, कविता कहार, तिपाशा खींची, मुनींद्र मीणा और अन्य ने पेम्पलेट बांटे।
बढ़ते प्रदूषण और वैकल्पिक वेटलैंड पर याचिका दायर
अजमेर. शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और आनासागर झील के वैकल्पिक वेटलैंड की तलाश का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दोनों मामलों को लेकर शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की गई। इसमें राजस्थान पत्रिका की खबरों को विशेष तौर पर आधार बनाया गया है।
याचिककर्ता अशोक मलिक ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की। याचिका में बताया कि अजमेर शहर के तापमान में बदलाव के साथ हवा में प्रदूषण का एयर क्वालिटी इंडेक्स पर असर पड़ रहा है। वाहनों से उत्सर्जित धुएं, धूल के कण से प्रदूषण बढ़ गया है। गर्मी और तापमान में बढ़ोतरी के साथ एयर क्वालिटी इंडेक्स 175 से 180 तक पहुंचना स्थिति गंभीर होना दर्शाता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आमजन के लिए प्रदूषण मुक्त पानी और वायु जरूरी है। इस मामले में टीएन गोदावरम बनाम केंद्र सरकार (1997) में स्वच्छ जलवायु और पेयजल को लेकर अदालत फैसला दे चुकी है।
संरक्षित हो आनासागर का वेटलैंड
मलिक ने याचिका में स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट में तैयार हुए करोड़ों के विकास कार्यों को ध्वस्त करने के आदेश के बावजूद प्रशासन के सेवन वंडर्स को बचाने के लिए वैकल्पिक वेटलैंड की तलाश को लेकर भी याचिका लगाई गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि एनजीटी के आदेश के मंशानुरूप आनासागर झील के किनारे से अवैध निर्माण पूरी तरह हटवाकर यहीं वेटलैंड विकसित करवाया जाए। स्थानीय प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में विचाराधीन प्रकरण में मूल जगह को छोड़कर वैकल्पिक जगह वेटलैंड बनाने के लिए प्रयासरत है। जबकि आनासागर झील को बचाने के लिए इसके आसपास के दायरे को ही वेटलैंड घोषित करने की जरूरत है। वैकल्पिक वेटलैंड का प्रस्ताव बनाना शीर्ष कोर्ट के आदेश की मनमाने ढंग से व्याख्या करना है। गौरतलब है कि आनासागर झील के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण की 7 अप्रेल को सुनवाई तय है।
Published on:
16 Apr 2025 10:25 pm
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