जिला कलक्टर के पास भी पहुंचे किसानों ने दर्ज कराई शिकायत
किसानों ने की मामले में निष्पक्ष जांच की मांग
प्रतापगढ़. गत वर्ष खरीफ फसल 2022 में किए गए फसली बीमा को लेकर किसानों में मायूसी है। अधिकांश किसानों को बीमा राशि भी नहीं मिली है। जबकि कई किसानों के खाते में बीमा क्लेम की राशि बहुत कम आई है। जबकि मौके पर खरीफ में काफी खराबा था। इसके लेकर बीमा कम्पनी की ओर से सर्वे में भी खराबा अधिक अंकित किया गया था। इसके बाद भी अब किसानों को काफी कम बीमा क्लेम मिल रहा है। इसे लेकर किसानों में जांच की मांग उठाई है। वहीं किसानों ने आरोपी लगाया है कि फसली बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों की ओर से फोन नहीं उठाया जाता है। जिससे वे पुन: शिकायत नहीं कर पा रहे है। इसे देखते हुए जिला कलक्टर के पास भी किसानों की शिकायतें पहुंच रही है। जिस पर उन्होंने कृषि विभागीय अधिकारियों के मार्फत फसली बीमा कम्पनी से वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मांगी है।
70 प्रतिशत खराबे का बीमा क्लेम एक रुपया
फसली बीमा कम्पनी की ओर से किसानों के साथ किस प्रकार से नाइंसाफी की जा रही है। इसका उदारहण जिला कलक्टर के पास जनसुनवाई में आया। जिसमें बसाड़ के किसान ने परिवाद दिया है। जिसमें बताया कि उसके 6 हैक्टेयर की सायोबीन की फसल प्रभावित हुई थी। जिसमें बीमा कम्पनी के सर्वे में 70 प्रतिशत खराबा आंका गया था। हाल ही में उसके खाते में बीाम कम्पनी की ओर से एक रुपए डाला गया है। इसे लेकर जिला कलक्टर ने कृषि विभाग से इसकी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही विभाग की ओर से बीमा कम्पनी से भी जवाब मांगा है। इसी प्रकार नौगावां के कचरूलाल आंजना के 22 बीघा की प्रभावित फसल का बीमा मिला 4 बीघा का, वीरू डांगी के 35 बीघा की बीमा क्लेम मात्र 16 सौ रुपए मिली है। नौगांवां में किसानों को नहीं मिल रहा वास्तविक क्लेम
जिले के अरनोद उपखंड के नौगांवा इलाके में गत वर्ष सोयाबीन की फसल में खराबे के बाद बीमा कम्पनी की ओर से सर्वे किया गया। जिसमें प्रशासन की ओर से जांच में किसानों के वास्तविक रकबा और खराबे में कई हेरा-फेरी पाई गई। इसे देखते हुए तत्कालीन जिला कलक्टर ने मौके पर किसानों और बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों को बुलाया गया। जहां किसानों के खेतों में भी मौका-मुआवना किया गया। जिसमें भी कम्पनी सर्वे में नुकसान का रकबा 80 प्रतिशत तक था। उसे घटाकर मात्र 10 प्र्रतिशत ही लिखा गया। तब कम्पनी के प्रदेश हेड की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि इसे सुधार कर 80 प्रतिशत कर इस हिसाब से बीमा राशि का क्लेम दिया जाएगा। लेकिन किसानों को कम खराबे का ही भुगतान दिया जा रहा है। यहां गांव में जिन किसानों को रसीदें दी थी। उनको भी अभी तक भुगतान नहीं किया है। उस समय किसानों ने एक परिवाद भी थाना अरनोद में दिया था। लेकिन यह भी ठंडे बस्ते में चली गई।
बीमा कम्पनी से मांगी है जानकारी
किसानों की शिकायतों पर फसली बीमा से जानकारी मांगी जा रही है। फसली बीमा का एक-एक प्रतिनिधि उपखंड मुख्यालय पर कृषि विभाग के कार्यालय में रहता है। उसके पास शिकायत की जा सकती है। वहीं जो भी किसान जिला प्रशासन और कृषि विभाग को शिकायतें कर रहे है। उनके प्रकरण में फसली बीमा कम्पनी से जानकारी मांगी जा रही है।
कृष्णकुमार, संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार, प्रतापगढ़.
उच्च स्तरीय जांच आवश्यक
किसानों के साथ खरीफ 2022 के फसली बीमा में कई खामियां है। जिससे किसानों को बीमा राशि का क्लेम पूरा नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में कई बार बीमा कम्पनी से सम्पर्क और शिकायतें की जा रही है। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। कम्पनी द्वारा की गई गड़बड़ी के कागजात भी किसानों के पास है। जिला कलक्टर को इसमें संज्ञान लेकर कार्रवाई करवानी चाहिए।
सूरज आंजना, उपाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, प्रतापगढ़