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प्रतापगढ़

अधूरे भरे बांधों से कहीं अधूरी ना रह जाए किसानों की आस

औसत के मुकाबले ९१ प्रतिशत हुई बारिश

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प्रतापगढ़. जिले में इस वर्ष मानसून का दौर भी खत्म हो गया है। वहीं इस बार मानसून की बेरुखी के कारण कई जलाशय अब भी खाली है। ऐसे में रबी फसल बुवाई पर्याप्त इलाके में होने पर संशय है। इसे लेकर कमांड इलाके में बुवाई में कमी आने की आशंका पर किसानों में भी ङ्क्षचता गहराने लगी है।
गौरतलब है कि इस बार शुरुआत से ही मानसून की बेरुखी रही। ऐसे में दो माह तक रुक-रुककर बारिश का दौर चला। वहीं गत माह बारिश नहीं हुई। ऐेसे में फसलों में विपरित प्रभाव पड़ा। वहीं सितंबर के अंतिम सप्ताह में बारिश हुई। इससे फसलें खराब हो गई। हालांकि जलाशयों में पानी की आवक बढ़ गई। लेकिन गत दिनों से मानसून ने विदाई ले ली है। जिससे अब बारिश की संभावना नहीं है। जिले में औसत बारिश ९८४ एमएम के मुकाबले ९०२ एमएम ही हुई है। जो औसत की ९१ प्रतिशत ही है। जिससे जलाशय खाली है। जिले में १६ जलाशयों में से नौ बांध ही लबालब हुए है। जबकि सात बांध खाली है। ऐसे में कमांड इलाके में रबी की बुवाई पर संशय के बादल है। ऐसे में किसानों में भी ङ्क्षचता सताने लगी है।
इन बांधों को पानी की आस
जिले में प्रमुख १६ बांधों में ९ बांध अब भी खाली है। जिसमें गादोला, मचलाना, बरडिय़ा, चाचाखेड़ी, बसेड़ा लोवर, जाखम, वाजना बांध अब भी खाली है। इनमें से गादोला, मचलाना बांध तो काफी कम भरे है। जबकि इन बांधों से सैंकड़ों हैक्टेयर में रबी की बुवाई होती है।
३१ मीटर के मुकाबले २८ मीटर भरा जाखम बांध
प्रतापगढ़ जिले का सबसे बड़ा बांध जाखम अब भी खाली है। यह बांध काफी बड़ा भराव क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका गेज कुल ३१ मीटर का है। लेकिन यह अब तक २८ मीटर ही भरा है। हालांकि इसमें मिलने वाली कई नदियों में पानी बह रहा है। जो इसमें समहिता हो रहा है।