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कांठल के किसान होने लगे जागरुक

प्रतापगढ़.कांठल में सोयाबीन की लगातार बुवाई से जहां खेत की मिट्टी पर प्रतिकूल प्रभाव होने लगा है। वहीं उत्पादन भी कम होता जा रहा है। ऐसे में किसान भी अब जागरुक होने लगे है। तीन वर्षों से सोयाबीन की बुवाई कम होती जा रही है। मक्का की बुवाई बढ़ती जा रही है। इस वर्ष कृषि विभाग की ओर े सायेाबीन का रकबा गत वर्ष एक लाख 83 हजार हैक्टेयर से घटाकर एक लाख 73 हजार हैक्टेयर किया है। वहीं मक्का का रकबा गत वर्ष 46 हजार से बढ़ाकर 51 हजार हैक्टेयर में किया है।

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कांठल के किसान होने लगे जागरुक

कांठल के किसान होने लगे जागरुक


-खरीफ में घटजा जा रहा सोयाबीन का रकबा
परम्परागत फसल मक्का का रकबा बढ़ रहा
-एक ही फसल से घट रही खेतों की उर्वरा शक्ति, उत्पादन भी होने लगा कम
प्रतापगढ़.
कांठल में सोयाबीन की लगातार बुवाई से जहां खेत की मिट्टी पर प्रतिकूल प्रभाव होने लगा है। वहीं उत्पादन भी कम होता जा रहा है। ऐसे में किसान भी अब जागरुक होने लगे है। तीन वर्षों से सोयाबीन की बुवाई कम होती जा रही है। वहीं परम्परागत फसल मक्का की बुवाई बढ़ती जा रही है। इस वर्ष कृषि विभाग की ओर े सायेाबीन का रकबा गत वर्ष एक लाख 83 हजार हैक्टेयर से घटाकर एक लाख 73 हजार हैक्टेयर किया है। वहीं मक्का का रकबा गत वर्ष 46 हजार से बढ़ाकर 51 हजार हैक्टेयर में किया है।
गौरतलब है कि गत दो दशक से कांठल में सोयाबीन की फसल का उत्पादन शुरू हुआ था। जो व्यावसायिक दृष्टि से काफी अच्छा रहा। लेकिन गत कुछ वर्षों से सोयाबीन की फसल व अन्य फसलों में कीटों, इल्लियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इनके नियंत्रण के लिए किसानों ने कीटनाशकों का उपयोग काफी अधिक करना शुरू कर दिया है। वहीं हर साल एक ही फसल लेने से खेतों की उर्वरा शक्ति भी कम होती जा रही है। इसका नतीजा यह हो गया है कि उत्पादन में लगातार कमी होती जा रही है। जो अब किसानों की समझ में आने लगा है। किसान भी हर वर्ष फसलों को बदलकर बुवाई करने लगा है। जिससे गत दो वर्ष से सोयाबीन का रकबा कम होता जा रहा है। जबकि मक्का का रकबा बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही उड़द का रकबा भी इस वर्ष बढ़ा है।
एक हजार हैक्टेयर की कमी
कृषि विभाग की ओर से वर्ष 2021 की खरीफ की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विभाग के सहायक निदेशक गोपालनाथ योगी ने बताया कि गत वर्ष जिले में एक लाख 914 हजार 361 हैक्टेयर में खरीफ की बुवाई की थी। जबकि इस वर्ष विभाग ने एक लाख 90 हजार हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें गत वर्ष के मुकाबले एक हजार हैक्टेयर में कमी की है। इसका कारण किसानों का रुझान अजवाईन की तरफ होना है। वहीं कई किसानों का रुझान रबी में अगेती फसल का भी है। जिससे अभी किसान खेतों को खाली छोड़ते है। इसमें सितंबर में अगेती किस्मों की बुवाई करते है।
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फोटो......बुवाई की तैयारियों में जुटे भूमिपुत्र
प्रतापगढ़. जिले में मानसून पूर्व की बारिश और मौसम में हो रहे परिवर्तन को देखते हुए किसान भी तैयारियों में जुट गए है। हाल ही में तौकते तूफान के दौरान चार दिनों तक बारिश हुई। इसके बाद से किसान भी खरीफ के लिए तैयारियों में जुट गए है। अभी खेतों में हंकाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही किसानों ने अपने घर पर बीजों की सफाई भी शुरू कर दी है।
पहाड़ी इलाकों में अभी बैलों से हंकाई का कार्य जारी है।

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जिले में खरीफ बुवाई का आंकड़ा
फसल वर्ष 2015-20 वर्ष 2020 वर्ष 2021
मक्का 41000 46000 51000
सोयाबीन 132450 183427 172800
उड़द 4332 3094 5000
मूंगफली 662 1929 2000
अरहर 23 150 201
धान 432 676 1000
कपास 986 920 1000
ज्वार 915 30 1000
अन्य 2460 779 250
कुल 183260 191361 190000
(आंकड़े कृषि विभाग के अनुसार हैक्टेयर में)
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मक्का की तरफ बढ़ रहा रुझान
जिले में गत कई वर्षों से खरीफ में सोयाबीन की बुवाई काफी की जा रही है। इससे लागत अधिक और उत्पादन कम होने लगा है। जबकि फसल चक्र अपनाने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। ऐसे में किसानों में जागरुकता होने लगी है। किसान अब सोयाबीन के स्थान पर परम्परागम मक्का की बुवाई करने लगे है। इससे विभाग ने भी मक्का का रकबा बढ़ाया है।
रमेश जोरोली, उप निदेशक, कृषि विस्तार, प्रतापगढ़.